मुजफ्फरनगर में रिश्वतखोरी का आरोप! होम्योपैथिक अधिकारी पर 15 हजार रुपये वसूलने का दावा, कथित वीडियो से मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर में रिश्वतखोरी का आरोप! होम्योपैथिक अधिकारी पर 15 हजार रुपये वसूलने का दावा, कथित वीडियो से मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर। जिले में तैनात जिला होम्योपैथिक अधिकारी अक्षय कात्यान पर भ्रष्टाचार और कथित रूप से जबरन रुपये वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं। निकुंज मेडिसिन हब के संचालक सुधीर यादव ने आरोप लगाया है कि अधिकारी उनके मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे, जहां उन्हें डराया-धमकाया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। सुधीर यादव का दावा है कि दबाव बनाकर उनसे 15 हजार रुपये वसूल किए गए। मामला सामने आने के बाद जिले के दवा कारोबारियों में चर्चा तेज हो गई है।

कथित रुपये लेने का फुटेज सामने आने से बढ़ा विवाद

इस प्रकरण में जिला होम्योपैथिक अधिकारी से जुड़ा रुपये लेने का एक कथित फुटेज सामने आने की बात कही जा रही है। इस फुटेज को लेकर मामला और गरमा गया है। हालांकि, फुटेज की वास्तविकता, उसमें दिखाई दे रही घटना की परिस्थितियों और रुपये के लेन-देन के उद्देश्य की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। केवल फुटेज के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि रकम रिश्वत के रूप में ही ली गई थी।

मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए कथित फुटेज की प्रामाणिकता, घटनास्थल, समय और लेन-देन से जुड़े सभी तथ्यों की जांच जरूरी है। साथ ही, शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारी का पक्ष सुनकर उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि जांच में पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से धन लेने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने की निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर मुजफ्फरनगर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुभाष चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रशासन और प्रदेश सरकार से प्रकरण का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सुभाष चौहान के अनुसार, निकुंज मेडिसिन हब के संचालक सुधीर यादव की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिला होम्योपैथिक अधिकारी अक्षय कात्यान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारी की संपत्ति की जांच कराने की मांग भी उठाई है।

एसोसिएशन का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि किसी कारोबारी से अनुचित तरीके से धन लेने की बात सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

कारोबारी वर्ग में चर्चा, कार्रवाई पर नजर

आरोप सामने आने और कथित फुटेज की चर्चा के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर सुर्खियों में है। मेडिकल स्टोर संचालक की ओर से लगाए गए आरोपों ने संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने, विभागीय जांच शुरू होने या संबंधित अधिकारी के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी अक्षय कात्यान का पक्ष भी सामने आना बाकी है।

जांच और साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

पूरे मामले में शिकायतकर्ता के आरोप, कथित फुटेज और संबंधित अधिकारी का पक्ष महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सभी साक्ष्यों का सत्यापन कराने की अपेक्षा की जा रही है। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर कानून और विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल इस प्रकरण में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। मामले की वास्तविक स्थिति जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और सभी संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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