मुजफ्फरनगर। धर्मनगरी मुजफ्फरनगर में शारदीय रामलीला महोत्सवों की धूम देखने को मिल रही है। शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल और नई मंडी में आयोजित रामलीला मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे हैं। दोनों स्थानों पर कलाकारों द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया जा रहा है। टाउन हॉल में रावण द्वारा सीता हरण और जटायु उद्धार के प्रसंग ने दर्शकों को रोमांचित किया, जबकि नई मंडी की शताब्दी वर्ष रामलीला में कैकेयी-दशरथ संवाद, श्रीराम वनगमन और केवट संवाद की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

दोनों रामलीला स्थलों पर धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का संदेश भी दिया जा रहा है। कलाकारों के अभिनय, संवाद अदायगी और मंच सज्जा को दर्शकों ने सराहा। रामलीला आयोजकों का कहना है कि इन धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना है।

टाउन हॉल में सीता हरण और जटायु उद्धार का मंचन
श्री रामलीला सभा रजिस्टर्ड टाउन हॉल की ओर से आयोजित रामलीला के नवम दिवस पर सीता हरण और जटायु उद्धार के प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने रावण द्वारा छलपूर्वक माता सीता का हरण करने और उन्हें बचाने के लिए जटायु के संघर्ष की कथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। जटायु के बलिदान और भगवान श्रीराम द्वारा उनके उद्धार के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
कलाकारों की संवाद अदायगी और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। मंचन के दौरान रामायण के प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शक लीला से जुड़े रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अंकुर दुआ, विश्वजीत गोयल, मनोज गुप्ता, प्रवीन गोयल और राजीव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। रामलीला सभा के पदाधिकारियों, अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष तथा निर्देशक जगन्नाथ रोहेला और नितिन नामदेव ने अतिथियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया।
इसके बाद अतिथियों ने प्रभु श्रीराम को तिलक लगाया और रामायण की महाआरती कर रामलीला का विधिवत शुभारंभ किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रसंगों का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
आयोजन में इनका रहा सहयोग
टाउन हॉल की रामलीला के आयोजन में साधुराम गर्ग, अजय गर्ग, कमल कांत, रविन्द्र गुप्ता, सोराज पाल, अर्पित राज अग्रवाल, अक्षित अग्रवाल, अंकुर सिंघल, रोहन मदान, सागर और राजन सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।
इसके अलावा वंश नामदेव, लक्की, रौनक यादव, मानू और पार्थ समेत कई लोग आयोजन से जुड़े रहे। श्रृंगार व्यवस्था में नीरज आर्य, पंकज वर्मा, प्रशांत बंसल और लक्की पेंटर ने सहयोग किया। कार्यक्रम में समस्त कलाकारों और प्रबंध समिति के सदस्यों की सहभागिता रही।
नई मंडी की शताब्दी वर्ष रामलीला में भावुक हुए दर्शक
नई मंडी में श्री रामलीला कमेटी की ओर से शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित रामलीला में मथुरा से आए सुप्रसिद्ध कलाकारों की मंडली ने विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध उद्योगपति अरविंद मित्तल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मंच पर कैकेयी-दशरथ संवाद, श्रीराम वनगमन और केवट संवाद जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने इन प्रसंगों में पात्रों की भावनाओं, पारिवारिक संबंधों और धर्म के प्रति समर्पण को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। प्रस्तुतियों के दौरान पांडाल में मौजूद दर्शक भाव-विभोर नजर आए और परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
कैकेयी-दशरथ संवाद में राजा दशरथ के वचन पालन और पुत्र श्रीराम के प्रति उनके स्नेह को दर्शाया गया। वहीं, श्रीराम वनगमन के प्रसंग में भगवान राम द्वारा पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजपाट त्यागने और वन की ओर प्रस्थान करने की कथा ने दर्शकों को मर्यादा और त्याग का संदेश दिया।
वचन पालन और त्याग की दिखाई गई मिसाल
रामलीला के मंचन में रघुकुल की परंपरा ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। राजा दशरथ ने दिए गए वचन का पालन करने के लिए भारी मन से श्रीराम को वनवास जाने की अनुमति दी। दूसरी ओर, भगवान श्रीराम ने पिता की आज्ञा और माता कैकेयी की इच्छा का सम्मान करते हुए बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय स्वीकार किया।
इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने दर्शाया कि जीवन में वचन की मर्यादा, माता-पिता का सम्मान और कर्तव्य पालन का कितना महत्व है। राम वनगमन के दृश्य में श्रीराम के त्याग और परिवार के प्रति समर्पण को देखकर दर्शक भावुक हो गए।
केवट संवाद ने दिया समानता और निश्छल भक्ति का संदेश
नई मंडी की रामलीला में केवट संवाद भी आकर्षण का केंद्र रहा। इस प्रसंग में भगवान श्रीराम और केवट के बीच प्रेम, विश्वास और भक्ति के संबंध को मंच पर उतारा गया। केवट की निश्छल भक्ति और भगवान राम द्वारा उसे स्नेह देने के प्रसंग ने दर्शकों को सामाजिक समानता और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।
कलाकारों ने इस प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण ही सबसे महत्वपूर्ण है। केवट प्रसंग ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए और मानवीय संबंधों में प्रेम तथा विनम्रता का विशेष स्थान है।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना रामलीला का उद्देश्य
श्री रामलीला कमेटी नई मंडी के अध्यक्ष संजय मित्तल, सचिव अशोक गर्ग, कोषाध्यक्ष आदित्य भरतिया, ब्रजगोपाल छरिया, राजेश गोयल, संजय जिंदल और श्याम ने संयुक्त रूप से बताया कि रामलीला का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन या सांस्कृतिक मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय संस्कृति की परंपराओं से परिचित कराना भी महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
समिति पदाधिकारियों के अनुसार, रामायण के प्रसंग जीवन में मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक समानता का महत्व समझाते हैं। इन आदर्शों को मंचन के माध्यम से प्रस्तुत करने से बच्चे और युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकते हैं।
नई मंडी की शताब्दी वर्ष रामलीला के आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के दौरान दर्शक कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए।
धार्मिक आस्था के साथ संस्कृति का संदेश
मुजफ्फरनगर में टाउन हॉल और नई मंडी की रामलीलाएं धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का माध्यम बनी हुई हैं। एक ओर सीता हरण और जटायु उद्धार जैसे प्रसंगों के माध्यम से साहस, त्याग और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर राम वनगमन और केवट संवाद ने मर्यादा, समानता तथा पारिवारिक मूल्यों की महत्ता को उजागर किया।
रामलीला आयोजकों और कलाकारों के प्रयासों से दर्शकों को रामायण की कथाओं को मंच पर देखने और उनके संदेशों को समझने का अवसर मिल रहा है। दोनों स्थानों पर उमड़ रही भीड़ और श्रद्धालुओं की सहभागिता से रामलीला महोत्सवों का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।

