मुजफ्फरनगर में बाल विवाह के खिलाफ बड़ा अभियान, मंदिर-मस्जिदों पर लगे जागरूकता बैनर; 500 ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ा

मुजफ्फरनगर में बाल विवाह के खिलाफ बड़ा अभियान, मंदिर-मस्जिदों पर लगे जागरूकता बैनर; 500 ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ा

मुजफ्फरनगर। जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को खत्म करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सोमवार 24 अगस्त 2026 को व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। ग्रामीण समाज विकास केंद्र और जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन परियोजना के तहत आयोजित इस अभियान में ग्रामीणों, बच्चों और अभिभावकों को बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी दी गई।

अभियान के दौरान लोगों से बच्चों को स्कूल भेजने, उनकी पढ़ाई जारी रखने और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की गई। खास बात यह रही कि जागरूकता का संदेश गांवों के धार्मिक स्थलों तक पहुंचाया गया, ताकि समाज के अधिक से अधिक लोगों को बाल विवाह के खिलाफ एकजुट किया जा सके।

मंदिर और मस्जिदों पर लगे जागरूकता बैनर

अभियान के लिए शाहपुर और खतौली क्षेत्र के चार गांवों पुरबालियान, बोपड़ा, नंगला और भैंसी को शामिल किया गया। इन गांवों की सीमा में आने वाले कुल दस धार्मिक स्थलों पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बैनर लगाए गए।

इन धार्मिक स्थलों में मंदिर और मस्जिद दोनों शामिल रहे। बैनरों के माध्यम से ग्रामीणों को बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षिक और कानूनी नुकसान की जानकारी दी गई। लोगों से अपील की गई कि वे अपने आसपास बाल विवाह की किसी भी कोशिश को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

अभियान से जुड़े लोगों ने ग्रामीणों को यह भी बताया कि यदि कहीं बाल विवाह का मामला सामने आता है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को तत्काल दी जानी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।

बाल विवाह के खिलाफ ग्रामीणों ने लिया संकल्प

जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों, बच्चों और उनके अभिभावकों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ भी दिलाई गई। लोगों ने संकल्प लिया कि वे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और किसी भी परिस्थिति में बाल विवाह का समर्थन नहीं करेंगे।

अभिभावकों ने अपने बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का भी संकल्प लिया। अभियान में वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके साथ ही उनकी शिक्षा और भविष्य की संभावनाएं भी प्रभावित होती हैं।

वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण और शिक्षा का अधिकार दिलाना केवल परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

500 ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की पहल

अभियान के दौरान ऐसे करीब 500 बच्चों की सूची भी तैयार की गई, जिन्होंने किसी कारणवश स्कूल छोड़ दिया था। इन बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में पहल की गई।

आयोजकों ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें वापस स्कूल से जोड़ना अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

बच्चों की मौजूदा शैक्षिक स्थिति और उन्हें लगातार स्कूल से जोड़े रखने के लिए आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के महत्व के बारे में समझाया गया।

25 वचन पत्र भरवाकर मजबूत किया सामाजिक संकल्प

बाल विवाह रोकने और बच्चों की शिक्षा जारी रखने के संकल्प को मजबूत करने के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों से 25 वचन पत्र भी भरवाए गए। इन वचन पत्रों के माध्यम से परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई बीच में नहीं रोकने और उन्हें बाल विवाह से दूर रखने का लिखित संकल्प लिया।

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल कानून के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए परिवार, ग्रामीण समाज, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर लगातार प्रयास करने की जरूरत है।

पुरबालियान में ग्राम बाल कल्याण संरक्षण समिति की बैठक

अभियान के तहत पुरबालियान गांव में ग्राम बाल कल्याण संरक्षण समिति की विशेष बैठक भी आयोजित की गई। ग्राम प्रधान की ओर से बुलाई गई इस बैठक में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, संरक्षण और कल्याण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।

समिति के सदस्यों ने कहा कि बच्चों से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान करना जरूरी है। इसके बाद संबंधित विभागों और संस्थाओं की मदद से उनका समाधान कराया जाना चाहिए।

बैठक में बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने और उनके अधिकारों की रक्षा करने को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं की जानकारी

अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना भी रहा। आयोजकों ने बताया कि कई गरीब परिवार आर्थिक परेशानियों के कारण बच्चों की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने के साथ कम उम्र में विवाह का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसी को देखते हुए ग्रामीणों को पात्रता के आधार पर उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करने की बात भी कही गई।

समाज की भागीदारी से ही खत्म होगा बाल विवाह

अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। परिवारों के साथ धार्मिक संस्थानों, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों को भी इस दिशा में लगातार काम करना होगा।

आने वाले समय में भी गांवों, धार्मिक स्थलों और समुदाय के बीच जागरूकता गतिविधियां चलाने की योजना है। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के साथ बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार दिलाने की कोशिश जारी रहेगी।

बाल विवाह के खिलाफ चलाया गया यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ उन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *