मुजफ्फरनगर में प्रदूषण फैलाने वालों पर बड़ी चोट: जानसठ का हिमालय एग्रो प्लांट सील, बंद मिला ETP; बॉयलर पर भी जड़ा ताला, औद्योगिक इकाइयों में मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर में प्रदूषण फैलाने वालों पर बड़ी चोट: जानसठ का हिमालय एग्रो प्लांट सील, बंद मिला ETP; बॉयलर पर भी जड़ा ताला, औद्योगिक इकाइयों में मचा हड़कंप

मुजफ्फरनगर। जिले में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी अभियान के तहत जानसठ क्षेत्र स्थित हिमालय एग्रो प्लांट पर विभागीय टीम ने छापेमारी कर उसे सील कर दिया। निरीक्षण के दौरान प्लांट में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) संचालित नहीं मिला। जल प्रदूषण से संबंधित नियमों के अनुपालन में अनियमितताएं पाए जाने पर अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्लांट की गतिविधियां बंद करा दीं और बॉयलर को भी सील कर दिया।

जानकारी के अनुसार, हिमालय एग्रो प्लांट के खिलाफ जल प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन नहीं किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लखनऊ मुख्यालय ने प्लांट को सील करने के आदेश जारी किए थे। आदेश प्राप्त होने के बाद सोमवार रात क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गितेश चंद्र के नेतृत्व में विभागीय टीम प्लांट पहुंची। टीम में जूनियर इंजीनियर राजा गुप्ता सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

निरीक्षण में संचालित नहीं मिला ईटीपी

विभागीय टीम ने प्लांट परिसर में पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान ईटीपी संचालित नहीं पाया गया। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित और रासायनिक अपशिष्ट जल का शोधन करने के लिए ईटीपी का संचालन अनिवार्य होता है। इसके बावजूद प्लांट में ईटीपी बंद मिलने पर अधिकारियों ने जल प्रदूषण से संबंधित नियमों के अनुपालन में गंभीर अनियमितताएं मानीं।

लखनऊ मुख्यालय से मिले निर्देशों के अनुपालन में टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्लांट को सील कर दिया। इसके साथ ही फैक्ट्री की गतिविधियां बंद कराकर बॉयलर भी सील किया गया। कार्रवाई के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने मौके पर मौजूद रहकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।

दूषित पानी का शोधन करना जरूरी

पर्यावरण संरक्षण और जल प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के तहत औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपचार करना आवश्यक है। ईटीपी के माध्यम से कारखानों से निकलने वाले रासायनिक और दूषित पानी को शोधित किया जाता है, ताकि वह बिना उपचार के नदियों, नालों और भूजल में न पहुंचे।

यदि ईटीपी का संचालन नहीं किया जाता है तो अनुपचारित औद्योगिक पानी जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकता है। इससे भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ आसपास के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से औद्योगिक इकाइयों में ईटीपी का नियमित संचालन और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन जरूरी माना जाता है।

अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी बढ़ी हलचल

हिमालय एग्रो प्लांट पर हुई कार्रवाई के बाद जानसठ और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस कार्रवाई को औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की दिशा में सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। कार्रवाई के बाद अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में भी ईटीपी के संचालन और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुपालन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध सहित विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण हो गया है। बोर्ड की कार्रवाई से साफ संकेत मिला है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं।

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