मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में 43 आपराधिक मुकदमों और एनडीपीएस से जुड़े मामलों में नामजद बताए जा रहे एक परिवार के पक्ष में पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने और शिकायतकर्ता के खिलाफ ही कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज करने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक लखनऊ, सहारनपुर रेंज के डीआईजी, मुजफ्फरनगर के एसएसपी और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामला थाना सिविल लाइन के तत्कालीन एसएचओ ओपी सिंह और तत्कालीन चौकी प्रभारी एवं विवेचक रेशम पाल सिंह की भूमिका से जुड़ा बताया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों ने उसकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय उसके खिलाफ ही एफआईआर संख्या 260/2024 दर्ज कर दी। वहीं, जिन लोगों के खिलाफ उसने शिकायतें की थीं, उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने आरटीआई अभिलेखों का हवाला देते हुए संबंधित परिवार के खिलाफ दर्ज आपराधिक और एनडीपीएस मामलों की जानकारी अधिकारियों के समक्ष रखी है।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने कथित रूप से 43 आपराधिक मुकदमों और एनडीपीएस मामलों से जुड़े लोगों के खिलाफ लगातार शिकायतें की थीं। उसका दावा है कि शिकायतों के साथ संबंधित साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद तत्कालीन एसएचओ ओपी सिंह और चौकी प्रभारी एवं विवेचक रेशम पाल सिंह ने शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उसके खिलाफ ही एफआईआर संख्या 260/2024 दर्ज कर दी गई। उसने संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर विभागीय जांच और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एएसपी सिद्धार्थ के मिश्रा कर रहे जांच
शिकायत के बाद प्रकरण की जांच वर्तमान में अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मिश्रा द्वारा की जा रही है। जांच प्रक्रिया अभी प्रचलित बताई जा रही है। शिकायतकर्ता को जांच के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया, जहां उससे प्रकरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी ली गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि करीब दो वर्ष से लंबित इस मामले में मौजूदा जांच प्रक्रिया को लेकर उसे उम्मीद है कि पूरे प्रकरण के तथ्य सामने आएंगे। हालांकि, जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आरटीआई के जरिए मांगी थी विभागीय जांच की जानकारी
शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दो अलग-अलग आवेदन भी दाखिल किए। आरटीआई आवेदन संख्या SSPMN/R/2026/60414 और SSPMN/R/2026/60413 के माध्यम से तत्कालीन एसएचओ ओपी सिंह और रेशम पाल सिंह के खिलाफ गठित प्रीलिमिनरी इंक्वायरी, विभागीय जांच और उससे संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि लोक सूचना अधिकारी ने दोनों आरटीआई आवेदनों में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। उसके अनुसार, जानकारी अस्वीकार करते समय धारा 11 और धारा 8(1)(j) का उल्लेख किया गया, लेकिन प्रत्येक बिंदु पर अलग से कारण नहीं बताया गया।
सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपील दाखिल
आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं होने के बाद शिकायतकर्ता ने नियमानुसार प्रथम अपील भी दाखिल कर दी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब मामला पुलिस अधिकारियों की भूमिका, प्रशासनिक जवाबदेही और वर्तमान में चल रही जांच से संबंधित है, ऐसे में जांच से जुड़े अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से एफआईआर संख्या 260/2024 और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं पर नियमानुसार निर्णय लेने की मांग की है।
फिलहाल मामले की जांच एएसपी स्तर पर जारी बताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

