मुजफ्फरनगर में खेत से ट्रैक्टर निकालने का विवाद बना खूनी दुश्मनी, छोटे भाई ने बड़े भाई की ले ली जान; अदालत ने सुनाई उम्रकैद

मुजफ्फरनगर में खेत से ट्रैक्टर निकालने का विवाद बना खूनी दुश्मनी, छोटे भाई ने बड़े भाई की ले ली जान; अदालत ने सुनाई उम्रकैद

मुजफ्फरनगर। शाहपुर के मोहल्ला सैनियान में हुए तेजवीर सिंह हत्याकांड में अदालत ने सगे बड़े भाई की हत्या के दोषी छोटे भाई सुखपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भाई-भाई के रिश्ते की मर्यादा और भारतीय समाज में भाईचारे के आदर्शों का उल्लेख करते हुए भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और भरत के उदाहरण दिए।

अदालत ने टिप्पणी की कि भारतीय परंपरा में भाइयों के बीच त्याग, प्रेम, विश्वास और कर्तव्य के अनेक उदाहरण मिलते हैं, लेकिन शाहपुर के इस मामले में छोटे भाई के कृत्य ने भाईचारे के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि गंभीर अपराध में दोषी के प्रति अनुचित सहानुभूति कानून की प्रभावशीलता और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है।

गन्ने के खेत से ट्रैक्टर निकालने को लेकर हुआ था विवाद

एडीजीसी कुलदीप कुमार के अनुसार, घटना 22 अप्रैल 2023 की है। सोनू सैनी ने शाहपुर थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि सुखपाल गन्ने के खेत से जबरन ट्रैक्टर-ट्रॉली निकाल रहा था। उसके बड़े भाई तेजवीर सैनी ने इसका विरोध किया।

विरोध को लेकर दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि सुखपाल ने अपने साथी के साथ मिलकर तेजवीर के साथ मारपीट की और उसके ऊपर ट्रैक्टर-ट्रॉली चढ़ा दी। घटना में तेजवीर गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन और अन्य लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से घटना से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष पेश किए गए। एडीजीसी कुलदीप कुमार ने अदालत को बताया कि आरोपी सुखपाल मृतक तेजवीर सैनी का सगा छोटा भाई है।

अदालत ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद सुखपाल को हत्या का दोषी माना। दोषसिद्धि के बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई, जिसमें न्यायालय ने सुखपाल को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

अदालत ने कहा, भाई की हत्या गंभीर अपराध के साथ पाप भी

फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि सुखपाल ने अपने सगे बड़े भाई तेजवीर उर्फ तेजू की हत्या की है। अदालत ने इस कृत्य को कानून की नजर में गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि भाई जैसे पवित्र रिश्ते में प्रेम, सहयोग, सुरक्षा और कर्तव्य की भावना होती है। ऐसे रिश्ते में हिंसा का सहारा लेकर भाई की जान लेना सामाजिक और नैतिक रूप से भी बेहद गंभीर है।

न्यायालय ने कहा कि भारतीय समाज में भाई-भाई का रिश्ता केवल खून का संबंध नहीं है, बल्कि इसमें त्याग, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी होती है। इस मामले में उसी रिश्ते की मर्यादा को हिंसा ने खत्म कर दिया।

राम और लक्ष्मण के रिश्ते का दिया उदाहरण

अदालत ने अपने फैसले में भगवान श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण के रिश्ते का उदाहरण भी दिया। न्यायालय ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पिता राजा दशरथ के वचन का पालन करते हुए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया था। लक्ष्मण को वनवास का आदेश नहीं मिला था, इसके बावजूद उन्होंने भाई के प्रति अपने कर्तव्य को सर्वोच्च मानते हुए श्रीराम के साथ वन जाने का निर्णय लिया।

लक्ष्मण ने कठिन परिस्थितियों में भी 14 वर्षों तक अपने भाई का साथ निभाया। अदालत ने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि भाई का रिश्ता त्याग, विश्वास और कर्तव्य से जुड़ा होता है।

भरत ने श्रीराम की खड़ाऊ को दिया था सम्मान

न्यायालय ने भगवान श्रीराम और भरत के रिश्ते का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि जब श्रीराम को पिता के वचन के कारण 14 वर्ष का वनवास मिला तो भरत ने उनके अधिकार का सम्मान किया। अयोध्या लौटने के बाद भरत ने श्रीराम से वापस लौटने का आग्रह किया, लेकिन जब श्रीराम वनवास की अवधि पूरी होने से पहले लौटने के लिए तैयार नहीं हुए तो भरत ने उनकी खड़ाऊ को सिंहासन पर रखकर राजपाट संभाला।

अदालत ने इस प्रसंग को भाईचारे, त्याग और मर्यादा का आदर्श उदाहरण माना। न्यायालय ने कहा कि भारतीय परंपरा में भाइयों के बीच अधिकार और सत्ता से ऊपर रिश्ते को महत्व देने की ऐसी मिसालें मौजूद हैं।

सुखपाल के कृत्य पर अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि एक तरफ राम, लक्ष्मण और भरत जैसे भाईचारे के आदर्श उदाहरण हैं, वहीं शाहपुर के इस मामले में छोटे भाई सुखपाल के कृत्य ने इसी पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया। बड़े भाई की हत्या को केवल आपसी विवाद का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने माना कि ऐसे गंभीर अपराध का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में गंभीर अपराधों के प्रति नरम रुख अपनाना न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

अनुचित सहानुभूति से कानून पर भरोसा कमजोर होने की आशंका

फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि गंभीर अपराध में दोषी के प्रति अनुचित सहानुभूति न्याय व्यवस्था के लिए नुकसानदायक हो सकती है। यदि ऐसे मामलों में जरूरत से ज्यादा नरमी बरती जाती है तो इससे आम लोगों के बीच कानून की प्रभावशीलता को लेकर गलत संदेश जा सकता है।

न्यायालय ने कहा कि समाज में कानून का विश्वास बनाए रखने और गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए न्यायिक व्यवस्था का मजबूत रहना जरूरी है।

तेजवीर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के साथ अदालत ने न केवल दोषी को दंडित किया, बल्कि भाई-भाई के रिश्ते की मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। खेत से ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालने को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक परिवार के लिए ऐसी त्रासदी बन गया, जिसमें बड़े भाई की जान चली गई और छोटे भाई को अब पूरी जिंदगी जेल में बितानी होगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *