मुजफ्फरनगर में किसान-मजदूर मोर्चे का हल्लाबोल, शाहआलम के हाउस अरेस्ट के विरोध में फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला; आंदोलन जारी रखने का ऐलान

मुजफ्फरनगर में किसान-मजदूर मोर्चे का हल्लाबोल, शाहआलम के हाउस अरेस्ट के विरोध में फूंका ज्ञानेश कुमार का पुतला; आंदोलन जारी रखने का ऐलान

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाहआलम को कथित रूप से हाउस अरेस्ट किए जाने के विरोध में शनिवार को संगठन का आक्रोश सामने आया। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर प्रशासनिक कार्रवाई के प्रति नाराजगी जताई। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने किसान, मजदूर और छात्रों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जनसमस्याओं को लेकर आवाज उठाने वाले लोगों को आंदोलन में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाहआलम ने दावा किया कि उन्हें पिछले दिन से ही घर में नजरबंद रखा गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संगठन के करीब 35 से 40 जिला अध्यक्षों और हजारों कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर हाउस अरेस्ट किया गया या हिरासत में लिया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपने से इनकार करते हुए अपनी मांगें सीधे शासन तक पहुंचाने की मांग की। मोर्चे ने स्पष्ट किया कि किसान, मजदूर और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका संघर्ष जारी रहेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष को हाउस अरेस्ट किए जाने पर जताई नाराजगी

भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाहआलम ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें पिछले दिन से ही हाउस अरेस्ट कर रखा है। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, छात्र और समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं को उठाना किसी भी तरह अपराध नहीं है। इसके बावजूद यदि जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों को घरों में रोक दिया जाता है और उन्हें अपने निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने दिया जाता, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शाहआलम ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्याएं शासन-प्रशासन के सामने रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलनकारियों को रोकने की कार्रवाई की जा रही है। उनके मुताबिक, प्रशासन को लोगों की आवाज दबाने के बजाय उनकी शिकायतें सुनकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन लंबे समय से किसान, मजदूर और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है। आगे भी इन वर्गों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर आवाज उठाई जाती रहेगी।

35 से 40 जिला अध्यक्षों और हजारों कार्यकर्ताओं को रोके जाने का दावा

चौधरी शाहआलम ने दावा किया कि भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के करीब 35 से 40 जिला अध्यक्षों तथा हजारों कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर हाउस अरेस्ट किया गया या हिरासत में लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के लोगों को विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे किसान-मजदूरों की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि संगठन जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है और आगे भी अपने कार्यक्रम जारी रखेगा।

हालांकि, संगठन की ओर से बताए गए जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की संख्या तथा कथित कार्रवाई के व्यापक स्तर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष सामने आने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर दर्ज कराया विरोध

राष्ट्रीय अध्यक्ष को कथित रूप से हाउस अरेस्ट किए जाने के विरोध में संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी जताई और अपने संगठन की मांगों को शासन तक पहुंचाने की बात कही।

मोर्चे के पदाधिकारियों का कहना था कि किसान, मजदूर और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों को रोकने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। संगठन ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में संबंधित पक्षों की बात सुनना और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई करना आवश्यक है।

पुतला दहन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन के नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों और मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देने से इनकार, सीधे शासन तक पहुंचाने की मांग

प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन सौंपने को लेकर भी संगठन ने अपना रुख स्पष्ट रखा। चौधरी शाहआलम और अन्य पदाधिकारियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि उनकी शिकायतों और आपत्तियों को सीधे शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि उच्च स्तर पर पूरे मामले का संज्ञान लिया जा सके।

संगठन का तर्क था कि जब उसकी मुख्य शिकायत प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर है, तो ज्ञापन भी उच्च अधिकारियों और शासन तक पहुंचना चाहिए। पदाधिकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि संबंधित अधिकारियों के सामने पूरे मामले को रखना चाहते हैं।

मोर्चे ने प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए मांग की कि संगठन के कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए और किसान-मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

मुकदमों और जेल का डर दिखाकर आवाज नहीं दबाई जा सकती: शाहआलम

राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाहआलम ने कहा कि किसान, मजदूर और छात्र अपने अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष करते आए हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमों का भय दिखाकर या जेल भेजने की आशंका पैदा करके उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आम लोगों की समस्याओं को उठाने वाले संगठनों को ही रोक दिया जाएगा, तो उनकी शिकायतें शासन तक कौन पहुंचाएगा। शाहआलम ने कहा कि संगठन किसी भी प्रकार के दबाव में पीछे हटने को तैयार नहीं है और किसानों, मजदूरों तथा छात्रों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा।

उन्होंने कहा कि मोर्चे का उद्देश्य इन वर्गों की समस्याओं को सामने लाना और उनके अधिकारों की पैरवी करना है। संगठन आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध-प्रदर्शन भी जारी रखेगा।

कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान, आंदोलन जारी रखने की घोषणा

चौधरी शाहआलम ने संगठन के कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर मजबूती के साथ आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई और दबाव के बावजूद मोर्चा अपने बुनियादी मुद्दों से पीछे नहीं हटेगा।

संगठन के अनुसार, किसान-मजदूरों और छात्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाने तथा उनके समाधान के लिए आगे भी प्रयास किए जाएंगे। प्रदर्शन के दौरान मोर्चे के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद संगठन और प्रशासन के बीच कथित हाउस अरेस्ट तथा कार्यकर्ताओं को रोके जाने को लेकर सवाल उठे हैं। जहां मोर्चे ने इसे अपने अधिकारों की आवाज उठाने से रोकने की कार्रवाई बताया है, वहीं आरोपों और कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। फिलहाल संगठन ने अपना विरोध जारी रखने और अपनी मांगें सीधे शासन तक पहुंचाने का रुख स्पष्ट कर दिया है।

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