मुजफ्फरनगर में किसानों का धरना शुरू, गन्ने का भाव 600 रुपये कुंतल करने की मांग; बोले- समाधान नहीं तो तेज होगा आंदोलन

मुजफ्फरनगर में किसानों का धरना शुरू, गन्ने का भाव 600 रुपये कुंतल करने की मांग; बोले- समाधान नहीं तो तेज होगा आंदोलन

मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर क्षेत्र में नावला के पास किसानों ने अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर धरना शुरू कर दिया। किसान सेवक एवं किसान हितैषी विनीत कुमार त्यागी के नेतृत्व में आयोजित धरने में गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने, चीनी मिलों को तत्काल चालू कराने, बकाया बिजली बिलों के कारण कनेक्शन काटने की कार्रवाई रोकने और बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग उठाई गई। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक जिलाधिकारी स्तर से ठोस आश्वासन और समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।

धरने को संबोधित करते हुए विनीत कुमार त्यागी ने कहा कि किसानों की 22 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन पहले भी प्रशासन को सौंपा गया था। उस समय मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसानों के मुताबिक अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याएं सुनने के बजाय प्रशासन आंदोलन को रोकने में अधिक सक्रिय दिखाई देता है।

गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग

किसानों ने कहा कि गन्ने के मूल्य में मामूली बढ़ोतरी से उनकी आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि गन्ने का भाव तय करते समय खेती की लागत के साथ चीनी मिलों में गन्ने से बनने वाले सह-उत्पादों से होने वाली आय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने चीनी, शीरा, एथेनॉल, खोई और बिजली से होने वाली आय का हवाला देते हुए गन्ने का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने सरकार से गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की अपील की।

विनीत त्यागी ने गन्ने की नई किस्मों के बीजों की कीमत का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों को बीज करीब 2,000 रुपये प्रति कुंतल तक बेचे जा रहे हैं। उन्होंने निर्धारित दर पर अनुदान के साथ बीज उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

चीनी मिलें जल्द चालू कराने पर जोर

धरने में चीनी मिलों के पेराई सत्र में देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने कहा कि अक्टूबर तक मिलें चालू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनके अनुसार अभी तक पेराई शुरू नहीं हुई है। उन्होंने चीनी मिलों को जल्द चालू कराने की मांग करते हुए कहा कि देरी से किसानों को गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था में परेशानी हो सकती है।

किसानों ने यह भी मांग की कि गन्ना पेराई सत्र शुरू होने तक बकाया बिजली बिलों के कारण उनके कनेक्शन न काटे जाएं। इसके साथ ही बिजली बिलों पर लगी पेनल्टी माफ करने और बिजली विभाग की छापेमारी पर रोक लगाने की मांग की गई।

बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज की जांच कराने की मांग

धरने के दौरान बेगराजपुर स्थित मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। विनीत त्यागी ने आरोप लगाया कि कॉलेज में दवा वितरण व्यवस्था में अनियमितताएं हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोरों से दवाइयों की बिक्री कराई जा रही है। उन्होंने मरीजों की संख्या घटने और स्थानीय लोगों को इलाज के लिए परेशान होने का दावा भी किया।

प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल कॉलेज की दवा वितरण व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। हालांकि, मेडिकल कॉलेज को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सड़क, नाली और खाद वितरण के मुद्दे भी उठाए

किसानों के आठ सूत्रीय मांगपत्र में एमडीए क्षेत्र के गांवों में सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास कराने की मांग शामिल है। इसके अलावा बेगराजपुर क्षेत्र में प्रदूषण की जांच, सरकारी नालियों के निर्माण और रखरखाव की समीक्षा तथा मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण व्यवस्था की जांच कराने की मांग भी उठाई गई।

मांगपत्र में सहकारी संस्थाओं में खाद वितरण और किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कराने का मुद्दा भी शामिल है। किसानों ने संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

विनीत कुमार त्यागी ने कहा कि किसान किसी को परेशान करने के लिए धरने पर नहीं बैठे हैं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हाईवे और रेलवे लाइन पास होने के बावजूद किसान संयम बनाए हुए हैं, लेकिन यदि प्रशासन ने बातचीत कर समस्याओं के समाधान की पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर किसान ट्रैक्टरों के साथ हाईवे पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं। धरने पर मौजूद किसानों ने दोहराया कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाता है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *