मुजफ्फरनगर। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मुजफ्फरनगर की विशेष गैंगस्टर अदालत ने वर्ष 2014 के एक पुराने मामले में फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या पांच काशिफ शेख की अदालत ने थाना तितावी में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में दोषसिद्ध विक्रान्त उर्फ गोलू पुत्र प्रतिपाल निवासी ग्राम बरवाला, थाना शाहपुर को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर दोषसिद्ध को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसला 18 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

वर्ष 2014 में दर्ज हुआ था गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा
मामला थाना तितावी में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 486/2014 से संबंधित है। पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की गई थी।
प्रकरण की सुनवाई सत्र वाद संख्या 3227/2026 के रूप में विशेष गैंगस्टर न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से संबंधित अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विक्रान्त उर्फ गोलू को दोषसिद्ध माना और चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
जेल में बिताई अवधि सजा में होगी समायोजित
न्यायालय ने अपने आदेश में दोषसिद्ध द्वारा इस मामले में जेल में बिताई गई अवधि को नियमानुसार दंडादेश में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने दोषी का सजायावी वारंट तैयार कर उसे जिला कारागार मुजफ्फरनगर भेजने का भी आदेश दिया।
अदालत के आदेश के अनुसार पांच हजार रुपये का अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त 15 दिन का कारावास भुगतना होगा।
पुलिस मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष ने की पैरवी
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत इस मामले में पुलिस मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। पुलिस के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक और पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में मामले की पैरवी की गई।
मामले में शासकीय अधिवक्ता दिनेश पुंडीर ने अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में पैरवी की। पुलिस के अनुसार सुनवाई के दौरान संबंधित अभिलेख और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसके बाद न्यायालय ने मामले में दोषसिद्धि का फैसला सुनाते हुए विक्रान्त उर्फ गोलू को चार वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी।

