बिजनौर पटाखा फैक्ट्री हादसा: मासूम ने इलाज के दौरान तोड़ा दम, गांव में मातम का माहौल

बिजनौर पटाखा फैक्ट्री हादसा: मासूम ने इलाज के दौरान तोड़ा दम, गांव में मातम का माहौल

बिजनौर। बिजनौर जनपद के मेघपुर गांव में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड में गंभीर रूप से झुलसे साढ़े तीन वर्षीय मासूम बच्चे ने सात दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में उपचाराधीन मासूम तैमूर ने गुरुवार को अंतिम सांस ली, जिसके बाद परिवार और पूरे गांव में कोहराम मच गया।

घटना के बाद शुक्रवार को जब मासूम का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव भोपा थाना क्षेत्र के रुड़कली तालाब अली पहुंचा तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में नम आंखों से बच्चे को सुपुर्दे खाक किया गया। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई और लोगों ने दिनभर चूल्हे नहीं जलाए।

जानकारी के अनुसार मेघपुर गांव में 12 जून को एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग लग गई थी। हादसे के समय भोपा थाना क्षेत्र के रुड़कली तालाब अली निवासी मोहम्मद फुरकान की पत्नी यासमीन अपने तीन बच्चों के साथ मायके में मौजूद थीं। इसी दौरान उनका सबसे छोटा बेटा तैमूर फैक्ट्री के पास खेलते हुए आग की चपेट में आ गया।

परिवार के अनुसार, हादसे के बाद मासूम को पहले काशीपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे AIIMS ऋषिकेश रेफर किया गया। डॉक्टरों ने कई दिनों तक उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर जलन और अंदरूनी चोटों के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

मृतक बच्चे के पिता मोहम्मद फुरकान ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें हादसे की सूचना समय पर नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि तुरंत जानकारी मिल जाती तो वे बच्चे को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पताल में ले जा सकते थे। उन्होंने इस मामले में पटाखा फैक्ट्री संचालकों और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों के अनुसार, 14 जून को सूचना मिलने के बाद पिता तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे की हालत देखकर उसे काशीपुर से एम्स ऋषिकेश ले जाया गया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी।

शुक्रवार को जैसे ही तैमूर का शव गांव पहुंचा, मां यासमीन, दादी मेहरुन्निसा और परिवार के अन्य सदस्य बिलख पड़े। पूरे गांव में मातम पसरा रहा और अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया।

स्थानीय लोगों ने भी अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्रियों की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति न हो सके।

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