मुजफ्फरनगर। जनपद के स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच शाहपुर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोयला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां खुजली और एलर्जी की समस्या का उपचार कराने पहुंची एक महिला मरीज को कथित तौर पर बीमारी के अनुरूप दवा देने के बजाय दर्द निवारक दवा लिखकर दे दी गई। आरोप है कि दवा का सेवन करने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसे कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। परेशान महिला ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई। शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित चिकित्सक से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

खुजली और एलर्जी की शिकायत लेकर पीएचसी पहुंची थी महिला

प्राप्त जानकारी के अनुसार शाहपुर क्षेत्र के गोयला गांव निवासी एक महिला कुछ दिन पूर्व त्वचा में खुजली और एलर्जी की समस्या से परेशान होकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोयला पहुंची थी। महिला ने अस्पताल में तैनात पीएचसी प्रभारी डॉ. रमाशंकर को अपनी परेशानी बताई और उपचार की मांग की। आरोप है कि महिला की बीमारी और लक्षणों को देखते हुए उचित दवा देने के बजाय उन्हें दर्द निवारक यानी पेनकिलर दवा लिख दी गई। इतना ही नहीं, अस्पताल की फार्मेसी से भी महिला को यही दवा उपलब्ध करा दी गई।
महिला ने चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा पर भरोसा करते हुए उसका सेवन कर लिया। आरोप है कि दवा खाने के बाद उनकी तबीयत असहज होने लगी और उन्हें कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद महिला ने चिकित्सक द्वारा किए गए उपचार और दी गई दवा को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिस बीमारी के उपचार के लिए वह अस्पताल पहुंची थीं, उसके अनुरूप उन्हें दवा उपलब्ध नहीं कराई गई।
गलत दवा देने के आरोप पर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत
मामले से परेशान महिला ने स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा दी। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि खुजली और एलर्जी की समस्या होने के बावजूद उन्हें दर्द निवारक दवा दे दी गई, जिसके सेवन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग में मामला चर्चा का विषय बन गया। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने पूरे प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया। उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. ओमप्रकाश जायसवाल को सौंपी, ताकि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके और संबंधित चिकित्सक की भूमिका की जांच की जा सके।
संबंधित चिकित्सक को नोटिस जारी कर मांगा गया जवाब
जांच अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश जायसवाल ने मामले की जांच के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोयला के प्रभारी चिकित्सक डॉ. रमाशंकर को नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांगा। इसके साथ ही शिकायतकर्ता महिला से भी संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान महिला के बयान और चिकित्सक से प्राप्त होने वाले स्पष्टीकरण को आधार बनाकर मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई।
जांच अधिकारी के अनुसार, महिला ने बताया कि दवा का सेवन करने के बाद उनकी तबीयत असहज हुई थी। हालांकि, जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं हो सका कि महिला को वास्तव में कौन सी दवा दी गई थी और वह दर्द निवारक दवा ही थी या नहीं। ऐसे में दवा के प्रकार और उसके प्रभाव को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
महिला ने आगे कठोर कार्रवाई कराने से किया इनकार
जांच प्रक्रिया के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता महिला ने आगे किसी कठोर कार्रवाई की इच्छा नहीं जताई। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिकायत के आधार पर जांच प्रक्रिया पूरी की गई। जांच अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश जायसवाल ने बताया कि संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा गया था और महिला से भी पूरे मामले की जानकारी ली गई है। प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी जा रही है।
सीएमओ की रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
अब इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के स्तर से रिपोर्ट का परीक्षण किए जाने के बाद ही संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को मिलने वाले उपचार और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि मरीजों की बीमारी को ठीक से समझने के बाद ही उचित उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। फिलहाल गोयला पीएचसी का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में है और सभी की निगाहें सीएमओ को सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट तथा उस पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

