मुजफ्फरनगर के कारोबारी पर कस्टम विभाग का शिकंजा! भूटान बॉर्डर से आए 215 ट्रक जांच के घेरे में, 40 करोड़ की कथित टैक्स चोरी से हड़कंप

मुजफ्फरनगर के कारोबारी पर कस्टम विभाग का शिकंजा! भूटान बॉर्डर से आए 215 ट्रक जांच के घेरे में, 40 करोड़ की कथित टैक्स चोरी से हड़कंप

मुजफ्फरनगर। भूटान बॉर्डर के रास्ते भारत में फेरो सिलिकॉन के आयात से जुड़े कथित टैक्स चोरी के मामले में पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग की जांच मुजफ्फरनगर तक पहुंच गई है। कस्टम विभाग की टीम ने शहर के कारोबारी राजीव जैन की तलाश में उनके आवास पर दबिश दी। टीम स्थानीय पुलिस को साथ लेकर भारत माता मंदिर के पास पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित उनके घर पहुंची, लेकिन कारोबारी वहां नहीं मिले। इसके बाद टीम ने उनके नाम कानूनी नोटिस तामील कराया।

कस्टम विभाग की जांच में सितंबर और अक्टूबर के दौरान भूटान बॉर्डर से फेरो सिलिकॉन से लदे 215 ट्रकों के भारत में प्रवेश करने और करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी की आशंका जताई गई है। नोटिस के मुताबिक, कारोबारी की फर्म श्री वैंकटेश्वर इंटरप्राइजेज के नाम पर आयात किया गया था। इसी सिलसिले में विभाग की टीम कारोबारी से संबंधित तथ्यों और आयात के दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

हालांकि, कथित टैक्स चोरी की वास्तविक राशि, आयात प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं और संबंधित कारोबारियों की जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल कारोबारी की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दो ट्रकों को पकड़े जाने के बाद खुली जांच की परतें

कस्टम विभाग की ओर से दिए गए नोटिस के अनुसार, मामले की शुरुआत 25 अक्टूबर को भारत-भूटान बॉर्डर पर फेरो सिलिकॉन से लदे दो ट्रकों को पकड़े जाने के बाद हुई। दोनों ट्रकों के माध्यम से भूटान से भारत में माल लाया जा रहा था। जांच के दौरान कथित अनियमितताएं सामने आने पर विभाग ने दोनों ट्रकों को सीज कर दिया।

इसके बाद कस्टम अधिकारियों ने माल के आयात से जुड़े दस्तावेजों, कारोबारी लेनदेन और सीमा पार से माल की आवाजाही की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान आयात की मात्रा और उससे संबंधित कर भुगतान के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि आयात के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

दो ट्रकों को पकड़े जाने से शुरू हुई जांच में जब अन्य खेपों और ट्रकों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो कथित तौर पर बड़े पैमाने पर आयात का मामला सामने आया। इसी आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया और मुजफ्फरनगर के कारोबारी तक कस्टम विभाग की टीम पहुंची।

सितंबर-अक्टूबर में 215 ट्रकों से माल आने का दावा

कस्टम विभाग की जांच के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर के दौरान करीब 215 ट्रक फेरो सिलिकॉन लेकर भूटान बॉर्डर के रास्ते भारत में दाखिल हुए। नोटिस में 8 सितंबर, 16 सितंबर, 19 सितंबर, 7 अक्टूबर और 25 अक्टूबर की तारीखों का उल्लेख किया गया है। इन तारीखों से संबंधित ट्रकों और आयात प्रक्रिया की जांच की जा रही है।

इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों के माध्यम से औद्योगिक कच्चे माल का आयात होने के कारण विभाग की जांच अब केवल पकड़े गए दो ट्रकों तक सीमित नहीं है। आयात की विभिन्न खेपों, संबंधित फर्मों के रिकॉर्ड और कर भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

मामले में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह राशि फिलहाल जांच के दायरे में है। दस्तावेजों के सत्यापन, माल के मूल्यांकन और लागू करों की गणना के बाद ही वास्तविक देनदारी का पता चल सकेगा।

श्री वैंकटेश्वर इंटरप्राइजेज के नाम पर हुआ आयात

कस्टम विभाग के नोटिस के मुताबिक, मुजफ्फरनगर निवासी कारोबारी राजीव जैन की फर्म श्री वैंकटेश्वर इंटरप्राइजेज के नाम पर फेरो सिलिकॉन का आयात किया गया था। इसी संबंध में विभाग की टीम कारोबारी की तलाश करते हुए मुजफ्फरनगर पहुंची।

टीम ने शहर कोतवाली और खालापार थाना पुलिस को साथ लेकर पार्श्वनाथ कॉलोनी स्थित कारोबारी के आवास पर दबिश दी। लेकिन कारोबारी के घर पर नहीं मिलने के कारण टीम ने उनके नाम कानूनी नोटिस तामील कराया।

नोटिस के माध्यम से कस्टम विभाग मामले में कारोबारी की भूमिका और आयात से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ा रहा है। अब यह जांच का विषय है कि फर्म के नाम पर कितनी मात्रा में माल आयात किया गया, उसके संबंध में कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और निर्धारित करों के भुगतान की स्थिति क्या रही।

फिलहाल राजीव जैन की ओर से इस मामले में कोई पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले उनकी भूमिका या कथित कर चोरी में उनकी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

क्या है फेरो सिलिकॉन, जिसकी हो रही थी खेपों में आपूर्ति?

फेरो सिलिकॉन लौह और सिलिकॉन से तैयार होने वाली एक मिश्रधातु है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से इस्पात निर्माण, धातु प्रसंस्करण और ढलाई उद्योग में किया जाता है। स्टील निर्माण के दौरान यह ऑक्सीजन हटाने में मदद करता है। इसके अलावा, इसका उपयोग लोहे और इस्पात के कुछ गुणों में सुधार के लिए भी किया जाता है।

औद्योगिक उत्पादन में इसकी उपयोगिता के कारण फेरो सिलिकॉन की मांग विभिन्न देशों में बनी रहती है। इसका अंतरराष्ट्रीय कारोबार आयात-निर्यात से जुड़े नियमों और सीमा शुल्क की प्रक्रिया के तहत होता है।

ऐसे आयात में माल की सही श्रेणी, मूल देश, घोषित कीमत, मात्रा और लागू सीमा शुल्क सहित अन्य करों का सही विवरण महत्वपूर्ण होता है। यदि इन विवरणों में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विभाग दस्तावेजों की जांच कर सकता है और नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।

भूटान बॉर्डर से आए फेरो सिलिकॉन के मामले में भी कस्टम विभाग इन्हीं पहलुओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित अनियमितता का सटीक तरीका स्पष्ट नहीं किया गया है।

जांच के घेरे में आयात के दस्तावेज और कारोबारी लेनदेन

215 ट्रकों के आयात और करोड़ों रुपये की कथित टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं का सत्यापन किया जाना है। इनमें आयात से संबंधित दस्तावेज, माल की मात्रा और मूल्य, संबंधित फर्मों के कारोबारी रिकॉर्ड तथा कर भुगतान के विवरण शामिल हैं।

कस्टम विभाग को यह भी पता लगाना होगा कि अलग-अलग खेपों का आयात किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया और उनके संबंध में निर्धारित शुल्क तथा करों का भुगतान किस प्रकार हुआ। इसके साथ ही यह जांचना भी जरूरी होगा कि कथित अनियमितताओं में किन कारोबारियों या फर्मों की भूमिका रही।

फिलहाल उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि कथित टैक्स चोरी की पूरी राशि की गणना किस आधार पर की गई है। न ही जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने की पुष्टि हुई है।

इसलिए 30 से 40 करोड़ रुपये की राशि को जांच में सामने आई कथित कर चोरी की आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी अंतिम रूप से प्रमाणित कर देनदारी के रूप में।

मुजफ्फरनगर तक पहुंची कार्रवाई से कारोबारी जगत में चर्चा

पश्चिम बंगाल कस्टम विभाग की टीम के मुजफ्फरनगर पहुंचने और कारोबारी के आवास पर दबिश दिए जाने के बाद स्थानीय कारोबारी जगत में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। सीमा पार से औद्योगिक कच्चे माल के आयात से जुड़े मामले में स्थानीय कारोबारी का नाम सामने आने से जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

इस प्रकरण में फिलहाल दो ट्रकों को सीज किए जाने, 215 ट्रकों के आयात की पड़ताल, कथित टैक्स चोरी की आशंका और कारोबारी को कानूनी नोटिस दिए जाने जैसे पहलू सामने आए हैं। आगे की जांच में दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

कस्टम विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आयात प्रक्रिया में वास्तव में किस प्रकार की अनियमितताएं हुईं, कितनी कर देनदारी बनती है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और किसी भी संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *