‘मिसाइल हों, लेकिन मन में मर्यादा न हो तो शक्ति अधूरी’, राजनाथ सिंह ने बताया भारत की असली ताकत का मंत्र

‘मिसाइल हों, लेकिन मन में मर्यादा न हो तो शक्ति अधूरी’, राजनाथ सिंह ने बताया भारत की असली ताकत का मंत्र

नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि जब हम पितृपक्ष में तर्पण करते हैं, तो हमें केवल अपने पूर्वजों का ही स्मरण नहीं करना चाहिए। हमें उन बलिदानियों का भी स्मरण करना चाहिए, जिन्होंने हमारी रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए। जो राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, वह कभी नहीं गिरता। जो राष्ट्र अपने बलिदानियों को स्मरण करता है, वह सदैव आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, “हमारे पास मिसाइल हों, लेकिन मन में मर्यादा न हो, तो शक्ति अधूरी है।

हमारे पास एआई हो लेकिन राष्ट्रीय चेतना न हो, तो विकास अधूरा है। यही हमारी विशेषता है। यही भारत की शक्ति है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को दिल्ली में स्थित राष्ट्र मंदिर विश्व रामायण आश्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने लोगों संवाद करते हुए अध्यात्म पर अपने विचार रखे। उन्होंने राष्ट्र मंदिर विश्व रामायण आश्रम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधन भी दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि बड़ा मनुष्य कभी केवल अपने लिए नहीं जीता। वह अपने जीवन को समाज के लिए समर्पित करता है, दूसरों के सुख-दुख को अपना मानता है और सबके लिए जीता है।

हमारे धर्मशास्त्रों, पुराणों से लेकर आज तक, हमारे संविधान, हमारी भारतीय न्याय संहिता, ये सब हमारे समाज के मानस की शुद्धि का कार्य करते हैं। ये हमें बताते हैं कि क्या उचित है, क्या अनुचित है। ये हमें दिशा देते हैं। ये हमें सभ्य बनाए रखते हैं। रक्षा मंत्री का कहना था कि यह मन का कलुष ही होता है, जो आए दिन राष्ट्र-विरोधी नारे लगाता है, और यह मानस की शुद्धि ही होती है जो राष्ट्र को अपना सर्वस्व मान बैठता है।

बड़प्पन केवल शक्ति और सामर्थ्य में नहीं, बल्कि सहनशीलता, उदारता और सबको साथ लेकर चलने की क्षमता में भी होता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि महान व्यक्तित्वों की विशेषता यही होती है, कि वे परिस्थितियों को समझते हुए भी अपने उदार भाव को नहीं छोड़ते। उन्हें यह भी ज्ञात होता है, कि कौन उनके स्नेह का लाभ उठा रहा है, कौन उनके धैर्य की परीक्षा ले रहा है। फिर भी वे अपने स्नेह का द्वार बंद नहीं करते। यह मन का कलुष ही होता है, जो अपने स्वार्थ के लिए समाज को बांटता है और यह मानस की शुद्धि ही होती है, जो अपने सुख से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि हम अपने प्रयासों से केवल मन की शुद्धि ही नहीं कर रहे हैं। हम अपने राष्ट्र को हर क्षेत्र में आगे भी बढ़ा रहे हैं। हम अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहे हैं। हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नए आयाम छू रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सरकार ने और भी कई प्रयासों से अपनी संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करने का प्रयास किया है। सरकार के प्रयासों से उज्जैन में बाबा महाकाल के भव्य कॉरिडोर का निर्माण किया गया।

दुनिया की प्राचीनतम नगरी, ज्ञाननगरी काशी में बाबा विश्वनाथ धाम के परिसर के पुनरुद्धार का कार्य किया गया। जो रामचंद्र जी देश के जनमानस में निवास करते हैं, उन रामजी को अयोध्या में निवास मिलना कितना मुश्किल कार्य हो गया था। जाने कितनी पीढ़ियां इस प्रतीक्षा में ही निकल गईं। लेकिन आज अयोध्या में राममंदिर अपनी पूरी भव्यता के साथ खड़ा है।” इस बीच रक्षामंत्री ने शुक्रवार को टेरिटोरियल आर्मी के स्थापना दिवस पर सभी जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दी। टेरिटोरियल आर्मी ‘नागरिक भी, सैनिक भी’ की भावना का बेहतरीन उदाहरण है, जो असाधारण प्रतिबद्धता के साथ देश की सेवा करने के आम नागरिकों के संकल्प को दर्शाती है। रक्षामंत्री ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आपदा राहत और राष्ट्र-निर्माण तक, इसके ‘टेरिटोरियल आर्मी’ ने साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा की बेहतरीन परंपराओं को कायम रखा है। राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और एक सुरक्षित, मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को रक्षामंत्री ने सैल्यूट किया।

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