मन और मस्तिष्क में शिवत्व के भाव से ही सृष्टि का कल्याण संभव : डॉ मुक्तानंद पुरी

मन और मस्तिष्क में शिवत्व के भाव से ही सृष्टि का कल्याण संभव : डॉ मुक्तानंद पुरी

 

बागपत। श्री सनातन धर्म प्रचारणी महासभा के तत्वाधान में हो रही शिव महापुराण कथा के पांचवे दिन राष्ट्रीय विप्र विद्वत् परिषद् के कोषाध्यक्ष उमेश कौशिक द्वारा षोडशोपचार विधि से पंचांग पीठ 64 योगिनी क्षेत्रपाल नवग्रह पूजन व रुद्राभिषेक के साथ पूजन यजमान आदेश गोयल भट्टे वाले सुनील मित्तल, विजय मल्होत्रा ने कराया गया।

पांचवे दिन व्यासपीठ से परमहंस डॉ मुक्तानंद पुरी ने बताया कि, कोई भी देव समुद्र से निकले हुए विष को ग्रहण करने में सक्षम नहीं थे भगवान शंकर ने उसे जनकल्याण की भावना से ग्रहण किया और सृष्टि को बचाया।उनका यही शिवत्व लोककल्याणकारी है। कहा कि कंठ में भले ही विष हो लेकिन,व्यक्ति का हृदय और मस्तिष्क भी शिवतत्व से प्रेरित हो विकारों से मुक्त होना चाहिए।व्यासपीठ से भगवान शंकर के एकादश रूद्र रूप की कथा भी सुनाई गई। आज की कथा में विशेष बात यह रही कि, जहाँ आयोजक वर्षा के मद्देनजर श्रोताओं की उपस्थिति का कम अंदाजा लगा रहे थे, ठीक इसके विपरीत संख्या लगातार बढती रही |रेखा शर्मा, पूनम शिवानी रेनू वीणा वीर बाला लक्ष्मी आदि महिलाएं, डॉ प्रभात वशिष्ठ सतवीर सिंह बड़का भाजपा राकेश डॉक्टर जगमोहन शर्मा अरविंद ठेकेदार रामपाल शर्मा विनोद कुमार आईटीआई वाले वीरेंद्र शर्मा फौजी संजय गुप्ता संजय सेन रामेश्वर दयाल शर्मा महेंद्र भगत पूनम तोमर अर्चना तोमर अनीता तोमर रविंद्र तिवारी राजेंद्र आत्रे करुणा तोमर कृष्ण पाल शर्मा राम कुमार शर्मा प्रदीप शर्मा आदि उपस्थित रहे। सनातन धर्म प्रचारिणी सभा के पदाधिकारी कार्यकर्ता लगातार व्यवस्था बनाने में प्रयासरत रहे।

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