मऊ। उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ कार्यक्रम के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर शहर कोतवाली पुलिस ने आपत्तिजनक नारेबाजी और पुतला दहन की कोशिश के मामले में आठ नामजद नेताओं-कार्यकर्ताओं समेत करीब 400 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। प्राथमिकी दारोगा राजेश कुमार की तहरीर पर दर्ज की गई।

सीओ सिटी नीतिश कुमार सिंह ने बताया कि 05 अक्टूबर को सपा, कांग्रेस और माकपा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सोनीधापा मैदान से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध था। मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न नारे लगाए और पुतला दहन का प्रयास किया। पुलिस का आरोप है कि आजमगढ़ मोड़ के पास प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने पुतले को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, इसी दौरान आग की चपेट में आने से पांच पुलिसकर्मी झुलस गए। इनमें उपनिरीक्षक राजेश कुमार, संजय कुमार तिवारी, योगेंद्र सिंह, अंबरीश कुमार पांडेय और कांस्टेबल राहुल शामिल बताए गए हैं।

तहरीर के मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जुलूस को आगे बढ़ाया गया। आरोप है कि गाजीपुर तिराहे के पास एक बार फिर पुतला जलाने की कोशिश हुई। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में भी पुतला दहन का प्रयास किए जाने और नारेबाजी की बात पुलिस ने प्राथमिकी में दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मुकदमे में मयंक पांडेय, शाहनवाज आलम, रवि प्रकाश, अजय यादव उर्फ प्रियांशु, अखिलेश भारती, आशीष यादव, देवेंद्र पांडेय उर्फ सत्यम और उमाशंकर उर्फ सोनू पंडित को नामजद किया गया है। इनके अलावा बड़ी संख्या में अज्ञात प्रदर्शनकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। मामले में पुलिस ने पुतला दहन के प्रयास, कथित आपत्तिजनक एवं उत्तेजक नारेबाजी तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई शुरू की है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बाद बढ़ी सियासी हलचल
मऊ की घटना ऐसे समय हुई जब उत्तर प्रदेश में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत विपक्षी दलों के प्रदर्शन हो रहे हैं। इस अभियान में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा रहा
पुलिस कार्रवाई से सामने आया विरोध प्रदर्शन का दूसरा पहलू
एक ओर विपक्षी दल इस तरह के कार्यक्रमों को चुनाव और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल उठाने का माध्यम बता रहे हैं, वहीं मऊ पुलिस ने जुलूस के दौरान कथित नारेबाजी, पुतला दहन के प्रयास और पुलिसकर्मियों के झुलसने को आधार बनाकर कानूनी कार्रवाई की है। मामले में अब जांच के बाद आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।

