मुजफ्फरनगर(संजय धीमान)। सनातन धर्म सभाभवन में आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा समिति के तत्वाधान में संगीतमय श्रीमदभागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन सती चरित्र, शिव परिवार, धुव्र चरित्र प्रसंग सुनाया गया। कथाव्यास परम पूजनीय श्रद्धेय युवासंत श्री प्रमोद सुधाकर जी महाराज रंगमहल धाम हरिद्वार नेे कहा कि मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पुण्यों का उदय होने पर ही श्रीमद् भागवत जैसी भगवान की दिव्य कथा श्रवण का सौभाग्य मिलता है। कथा स्थल पहुंचे माननीय मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिलदेव अग्रवाल जी का कथाव्यस व कथा आयोजको द्वारा नगर के लोकपीर्यता में जाने जाते कपिलदेव अग्रवाल का सम्मान किया। भविष्य में उसे स्थान का आशीर्वाद दिया। कथावाचक ने कहा की भागवत रूपी गंगा की धारा पवित्र और निर्मल है जो पापियों को भी तार देती है। सीताराम त्रिपाठी जी ने बताया कि मुनि वेद व्यास के पुत्र शुकदेव ने महाराजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का ज्ञान दिया था। वहीं सति चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण और उनका भाग न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। ध्रुव कथा प्रसंग में बताया कि सौतेली मां द्वारा अपमानित होकर बालक ध्रुव कठोर तपस्या के लिए जंगल को चल पड़े। बारिश, आंधी-तूफान के बावजूद तपस्या न डिगने पर भगवान प्रगट हुए और उन्हें अटल पदवी दी। ऋषभ देव कथा सुनाते हुए कहा कि वह अपने पुत्रों को गोविंद का भजन करने का उपदेश देकर तपस्या को वन चले गए। जड़ भरत को हिरनी के बच्चे से अत्यंत मोह हो गया। नतीजे में उन्हें मृग योनि में जन्म लेना पड़ा।
धुव्र चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रत्येक आश्रम में गृहस्थ सर्वोपरि होता है। नववेश जीव आनंदमय तब बनता है जब वह शिव की खोज करता है। सद्गुरु संत के महत्व को बताते हुए कहा कि सत्य में संत, चित्त में भगवंत और आनंद में श्रीमद् भागवत कथा के श्रोता बैठते हैं।इस कथा को सुनने से सम्पूर्ण मनोकामना पूर्ण होती है। कथा के यजमान विनोद धीमान, प्रदीप गोयल, संदीप मित्तल, राजेंद्र गोयल होंगे। कार्यक्रम में मुख्य पदाधिकारी पवन गोयल, अजय गुप्ता, संदीप मित्तल, अजय गोयल, आनंद गुप्ता, अमित गोयल, नवीन मित्तल, रजत गोयल, अभिषेक ममता रुचि अनीता भावना कविताआदि कार्यक्रम की सफलता में जुटे है।
