ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न मामले में जांच में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, विवेचक को तलब किया

ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न मामले में जांच में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, विवेचक को तलब किया

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ब्लैकमेलिंग और यौन उत्पीड़न के मामले में विवेचना में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। प्रयागराज के सोरांव थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में आरोपी रविशंकर उर्फ रवि कुमार पर बी.एन.एस.एस. की धारा 87 और 64(1) के तहत आरोप है।

पीड़िता के अनुसार आरोपी, जो उसका रिश्ते में चचेरा भाई बताया गया है, उसके घर आया और उसे नशीला पदार्थ मिला हुआ कोल्ड ड्रिंक पिला दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। होश में आने पर उसने खुद को निर्वस्त्र पाया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसे फोन कर एक अश्लील वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करना शुरू किया और उस पर दबाव बनाकर अपनी मां के गहने लेकर इंदौर रेलवे स्टेशन बुलाया। वहां पहुंचने पर जी.आर.पी. ने पीड़िता को हिरासत में लिया।

आरोपी का यह भी कहना है कि वह मूल एफ.आई.आर. में नामजद नहीं था, और बाद में पीड़िता की बरामदगी पर उसके बयान दर्ज किए जाने पर उसका नाम सामने आया। बचाव पक्ष के वकील ने यह भी दलील दी कि पीड़िता के बयान में जिस वीडियो का जिक्र है, वैसा कोई वीडियो मौजूद ही नहीं है।

राज्य सरकार की ओर से स्वीकार किया गया कि केस डायरी में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह पता चले कि जांच अधिकारी ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर यह जांचा हो कि उसमें वह कथित अश्लील वीडियो मौजूद था या नहीं।

इस पर नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने कहा कि पूरा मामला ही पीड़िता के अश्लील/न्यूड वीडियो पर आधारित है, बावजूद इसके जांच अधिकारी ने आरोपी का मोबाइल फोन जांच के लिए जब्त तक नहीं किया ।यह जांच अधिकारी की घोर लापरवाही है।

कोर्ट ने जांच अधिकारी को 23 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर इस लापरवाही के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। और यह आदेश पालन हेतु पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी 23 जुलाई 2026 को नियत की गई है।

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