मेरठ के हस्तिनापुर में बैंक मैनेजर संदीप कुमार की गर्भवती पत्नी और मासूम बेटे की हत्या दरकते रिश्तों और दरिंदगी की इंतहा की खौफनाक कहानी है। पुलिस लाइन में हत्यारोपी हरीश मावी ने वारदात का पूरा घटनाक्रम बताया तो रोंगटे खड़े हो गए।

हरीश ने बताया कि रवि ने शिखा की गोद से रूकांश को छीना और बाथरूम में ले गया। शिखा बेटे को छोड़ने की गुहार लगाती रही। उसने तिजोरी की चाभी देते हुए कहा कि सारे जेवरात और रुपये ले जाओ पर हमें मत मारो। रवि और हरीश के सिर पर खून सवार था। पहले रवि ने बाथरूम में बच्चे को मार डाला फिर दोनों ने शिखा के दुपट्टे से ही उसका गला घोंट दिया।

संदीप का बहनोई हरीश और उसका रिश्तेदार रवि जाटव आया तो शिखा ने स्कूल आए बेटे के कपड़े बदलने के बाद चाय बनाने की बात कही। तभी दोनों हत्यारोपी कमरे में पहुंच गए। शिखा घबरा गईं। इससे पहले वह कुछ समझतीं कि रवि ने उनकी गोद से रूकांश को छीन लिया। रवि बच्चे को बाथरूम में लेकर चला गया।
शिखा ने शोर मचाया और हरीश से बोलीं, तुम्हें क्या चाहिए। शिखा ने तिजोरी की चाभी देकर कहा कि मेरे बेटे को छोड़ दो, चाहे सारा सामान ले जाओ। मैं किसी को नहीं बताऊंगी। वह गिड़गिड़ा रही थी, तभी पांच मिनट बाद रवि बाथरूम से अकेला वापस आया।
पुलिस ने हरीश को शिखा के परिजनों से मिलवाया। परिजनों ने हरीश से पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया। वह चुप रहा और परिवार के लोग बार-बार उससे सवाल पूछते रहे। पुलिस ने हरीश को धमकाते कहा कि बताओ घटना वाले दिन क्या हुआ था। इसके बाद हरीश ने पूरा घटनाक्रम बताया तो परिवार के लोग चिल्ला उठे और कहा इस दरिंदे को फांसी होनी चाहिए। उसके बाद पुलिस हरीश को लेकर वहां से चली गई।

