बुढ़ाना बैंक घोटाले में खुलती जा रही फर्जीवाड़े की परतें, लखनऊ से पहुंची स्पेशल टीम; बड़े खातों की फॉरेंसिक जांच तेज

बुढ़ाना बैंक घोटाले में खुलती जा रही फर्जीवाड़े की परतें, लखनऊ से पहुंची स्पेशल टीम; बड़े खातों की फॉरेंसिक जांच तेज

बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की बुढ़ाना शाखा में सामने आए करीब 8.56 करोड़ रुपये के बहुचर्चित गबन मामले के 12वें दिन बैंक में कामकाज सामान्य और शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हुआ। शाखा में जमा और निकासी की प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रही। ग्राहकों की आवाजाही भी बनी रही। वहीं दूसरी ओर मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और फर्जीवाड़े से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने के लिए उच्च अधिकारियों की निगरानी में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है।

लखनऊ स्थित बैंक मुख्यालय से विशेष जांच टीम के बुढ़ाना पहुंचने के बाद शाखा में जांच का दायरा बढ़ गया है। टीम निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी बैंक खातों समेत शाखा के डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और बड़े खातों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच अधिकारियों का फोकस उन खातों और लेनदेन पर है, जिनके माध्यम से ग्राहकों की रकम कथित तौर पर दूसरे खातों में स्थानांतरित की गई।

जमा और निकासी का काम जारी, ग्राहकों का भरोसा लौटने लगा

बुधवार को शाखा में दिनभर ग्राहकों की आवाजाही रही। बैंक कर्मचारियों के अनुसार, धीरे-धीरे खाताधारकों का भरोसा बहाल हो रहा है और बैंक में जमा कराने वाले ग्राहकों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वहीं बड़ी संख्या में ग्राहक अपनी रकम निकालने के लिए भी बैंक पहुंच रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को करीब 13 लाख रुपये की निकासी हुई, जबकि लगभग पांच लाख रुपये जमा किए गए। इसके अलावा एक नया बैंक खाता खोले जाने के साथ एक नई एफडी भी कराई गई। बैंक प्रशासन का कहना है कि सामान्य बैंकिंग सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के साथ प्रभावित खाताधारकों की शिकायतों का भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है।

शुरुआती जांच में करीब 8.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद गबन की कुल रकम में बदलाव संभव है। जैसे-जैसे बैंक के रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच आगे बढ़ रही है, मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं।

लखनऊ मुख्यालय की निगरानी में बड़े खातों का फॉरेंसिक ऑडिट

शाखा के बड़े और संदिग्ध खातों की मॉनिटरिंग सीधे लखनऊ मुख्यालय से की जा रही है। जिला स्तर से पहुंची विशेष जांच टीम ने मंगलवार और बुधवार को बैंक के दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की। संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी शिकायतों और दस्तावेजों को संकलित कर मुख्यालय भेजा गया है।

लखनऊ से पहुंची उच्चस्तरीय तकनीकी टीम ग्राहकों के नाम पर जारी की गई कथित फर्जी एफडी और लोन खातों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किन खातों में किस प्रक्रिया के तहत रकम स्थानांतरित हुई और इसमें बैंक के किन कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका रही।

शादी और मांगलिक कार्यक्रम वाले 12 खाताधारकों की अलग फाइलें

बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक नितिन वर्मा के अनुसार, ऐसे 12 खाताधारकों की अलग फाइलें तैयार की गई हैं, जिनके घरों में शादी-विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रम हैं और जिनके खातों से कथित तौर पर फर्जी तरीके से रकम स्थानांतरित की गई। इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यालय भेजा जा रहा है।

उप क्षेत्रीय प्रबंधक नवदीप सिंह ने बताया कि बैंक प्रशासन की पहली प्राथमिकता उन पीड़ित खाताधारकों को राहत पहुंचाना है, जिन्हें तत्काल पैसों की जरूरत है। ऐसे ग्राहकों को चिह्नित कर उनके आवेदन तैयार कराए जा रहे हैं। इन्हें स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभावित खाताधारकों के खातों में धनराशि स्थानांतरित किए जाने की बात कही गई है।

ग्राहकों के खातों में बिना जानकारी के रकम ट्रांसफर करने का आरोप

गांव नगवा निवासी किरण ने बताया कि उसका केसीसी खाता था, जिसकी पूरी रकम जमा करने के बाद वह बैंक से नो-ड्यूज प्रमाणपत्र भी ले चुकी थी। इसके बावजूद उसके खाते से तीन लाख रुपये से अधिक की राशि कथित तौर पर दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

इसी गांव के पुष्पेंद्र के अनुसार, उनका छह लाख रुपये का केसीसी था, जिसका भुगतान पहले ही किया जा चुका था। इसके बावजूद उनके नाम पर कथित तौर पर दस लाख रुपये का दूसरा केसीसी तैयार कर रकम ट्रांसफर कर दी गई।

पीड़ित खाताधारकों का कहना है कि मामले की पूरी जांच होने और उनकी रकम वापस मिलने से ही उन्हें राहत मिलेगी। बैंक प्रशासन की ओर से भी प्रभावित ग्राहकों के मामलों को प्राथमिकता से निस्तारित करने की बात कही जा रही है।

पूर्व शाखा प्रबंधक समेत चार के खिलाफ मुकदमा

मामला उस समय सामने आया जब कई ग्राहकों को अपने खातों से बिना जानकारी के रकम कटने की जानकारी हुई। आरोप है कि ग्राहकों की ओर से शाखा प्रबंधक को दी गई नकद धनराशि उनके खातों में दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा ग्राहकों की जानकारी के बिना उनकी एफडी पर कथित तौर पर लोन जारी कर रकम अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

ग्राहकों की शिकायतों और शुरुआती जांच के बाद 23 सितंबर को बुढ़ाना कोतवाली में तत्कालीन शाखा प्रबंधक रूपक राणा, सहायक प्रबंधक नेहा दिलवालिया, गौरव अग्रवाल और कर्मचारी विकास कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की धाराओं में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पुलिस मामले में निलंबित कर्मचारियों और अधिकारियों के बैंक खातों तथा अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। साथ ही नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दिए जाने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही घोटाले में रकम के वास्तविक आंकड़े और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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