बांग्लादेश में ईद की खुशियां मातम में बदलीं, 13 दिनों में 292 सड़क हादसे और 281 मौतें; मोटरसाइकिल सवार सबसे ज्यादा शिकार

बांग्लादेश में ईद की खुशियां मातम में बदलीं, 13 दिनों में 292 सड़क हादसे और 281 मौतें; मोटरसाइकिल सवार सबसे ज्यादा शिकार

ढाका (बांग्लादेश)। बांग्लादेश में त्योहारों पर होने वाले सड़क हादसों में चिंताजनक वृद्धि ने सवाल खड़े किए हैं। रोड सेफ्टी फाउंडेशन (आरएसएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, 21 मई से 2 जून तक ईद-उल-अजहा के दौरान 13 दिनों के सफर में देश में 292 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें कुल 281 लोगों की मौत हो गई और 837 लोग घायल हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान हर दिन औसतन 22 लोगों की मौत हुई। मरने वालों में 34 महिलाएं और 48 बच्चे शामिल थे।

ढाका ट्रिब्यून में प्रकाशित आरएसएफ की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या मोटरसाइकिल सवारों की रही। मोटरसाइकिल से जुड़ी 141 दुर्घटनाओं में 124 लोगों की मौत हुई, जो कुल मौतों का 44.12% है। कुल सड़क दुर्घटनाओं में 48.28% हिस्सा मोटरसाइकिल दुर्घटनाओं का रहा। इन हादसों में पैदल चलने वाले 37 लोगों (13.16%) की मौत हुई, जबकि वाहनचालकों और उनके सहायकों में से 33 लोगों (11.74%) की जान गई।

इस दौरान जलमार्गों पर 13 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें आठ लोगों की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। साथ ही, कुर्बानी के लिए लाए गए 24 मवेशियों की भी मौत हो गई। इसके अलावा, रेल से जुड़ी 22 दुर्घटनाओं में 17 लोगों की मौत हुई और नौ लोग घायल हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, अन्य मौतों में बस के 21 यात्री (7.47%), ट्रक, कवर्ड वैन, पिकअप और ट्रैक्टर के 32 यात्री (11.38%), निजी कारों और एम्बुलेंस के 11 यात्री (3.91%), ऑटो-रिक्शा और ईजी-बाइक जैसे तीन पहिया वाहनों के 48 यात्री (17.08%), और स्थानीय स्तर पर बने वाहनों के आठ यात्री (2.84%) शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल दुर्घटनाओं में से 97 (33.21%) राष्ट्रीय राजमार्गों पर, 112 (38.35%) क्षेत्रीय सड़कों पर, 42 (14.38%) ग्रामीण सड़कों पर, 37 (12.67%) शहरी क्षेत्रों में और 4 (1.36%) अन्य स्थानों पर हुईं। 127 दुर्घटनाएं (43.49%) नियंत्रण खोने के कारण हुईं। 73 (25%) आमने-सामने की टक्कर से हुईं। 42 (14.38%) हादसे पीछे से टक्कर के कारण हुए। 38 (13%) राहगीरों को वाहनों ने टक्कर मारी। 12 हादसे (4.10%) अन्य कारणों से हुए।

इस दौरान ढाका डिवीजन में सबसे अधिक 95 दुर्घटनाएं और 101 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद राजशाही (मौतों का 18.50%), चटगांव (12.09%), खुलना (10.32%), रंगपुर (7.82%), बारीसाल (7.11%), मयमनसिंह (5.69%) और सिलहट (2.49%) का स्थान रहा। सिलहट में सबसे कम दुर्घटनाएं (नौ) हुईं, जिनमें सात लोगों की मौत हुई। जिलों की बात करें तो फरीदपुर में सबसे अधिक 19 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 28 लोगों की जान चली गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल ईद-उल-अजहा के दौरान 12 दिनों में 312 लोगों की मौत हुई थी, जो औसतन प्रतिदिन 26 मौतें थीं। इस साल, यह दैनिक औसत घटकर 21.61 हो गया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कमी का मतलब यह नहीं है कि परिवहन सुरक्षा में कोई ठोस सुधार हुआ है। आरएसएफ ने कहा कि बांग्लादेश में ईद की भारी भीड़ को संभालने के लिए कोई सुरक्षित और पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन प्रणाली नहीं है। इस कारण कई यात्रियों को जोखिम भरे परिवहन साधनों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

इसमें यात्रा के दौरान भीड़भाड़, अधिक किराया वसूलने और टिकट प्रणाली में अनियमितताओं का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईद की यात्रा के दौरान तंगैल के कालीहाटी में एक ट्रक दुर्घटना में 15 मजदूरों की मौत हो गई। फाउंडेशन ने दुर्घटनाओं के मुख्य कारणों के रूप में तेज गति, युवाओं का लापरवाही से मोटरसाइकिल चलाना, वाहनों की खराब स्थिति, कमजोर ट्रैफिक प्रबंधन और अयोग्य ड्राइवरों की पहचान की है।

रिपोर्ट में ईद पर यात्रा के दौरान सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने के लिए एक दीर्घकालिक एकीकृत परिवहन योजना, रेल सेवाओं के विस्तार, जल परिवहन में सुधार और सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय की सिफारिश की गई है।

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