बहराइच में घर में घुसा तेंदुआ, 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बनाया शिकार; मौत

बहराइच में घर में घुसा तेंदुआ, 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला को बनाया शिकार; मौत

बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के सुजौली थाना क्षेत्र के सीतारामपुरवा गांव में शुक्रवार तड़के एक तेंदुए ने 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतका फूलावती नहर के किनारे अपने कच्चे मकान में अकेली रहती थीं। तड़के करीब 3 बजे फूलावती अपने घर में चारपाई पर सो रही थीं, तभी तेंदुआ घर में घुस आया और उनकी गर्दन को जबड़े में दबोचकर घसीटते हुए झाड़ियों की ओर ले गया। महिला की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी बाहर निकले और टॉर्च जलाकर देखा तो तेंदुआ नजर आया। शोर मचाकर लोग उसके पीछे दौड़े, लेकिन अंधेरे के कारण वह जंगल में गायब हो गया।

सुबह करीब 5 बजे ग्रामीण दोबारा जंगल की ओर गए तो घर से करीब 50 मीटर दूर हल्दी के खेत के पास झाड़ियों में फूलावती का शव मिला। तेंदुआ उनका सिर और एक पैर पूरी तरह खा चुका था, जबकि दूसरे पैर का आधा हिस्सा भी खा लिया गया था।

सूचना मिलते ही सुजौली थाना प्रभारी राम गोविंद वर्मा, दरोगा चंदन यादव और कतर्नियाघाट रेंज की वन टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से शव को खेत से बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मौके पर तेंदुए के पैरों के निशान भी मिले हैं। वन विभाग ने इलाके में ट्रैप कैमरे और जाल लगा दिए हैं ताकि तेंदुए की गतिविधि पर नजर रखकर उसे जल्द पकड़ा जा सके। वन रेंजर नीरज श्रीवास्तव ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता दिलाई जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि सीतारामपुरवा, चफरिया और नहर बाजार इलाके में पिछले एक हफ्ते से तेंदुए की लगातार चहलकदमी देखी जा रही है और यह इस दौरान तीसरी घटना है। इससे पहले बुधवार को उसी इलाके में तेंदुए ने एक बकरी का शिकार किया था, लेकिन उस वक्त कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा था। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।

घटना की सूचना पर पहुंचीं फूलावती की नातिन सुदामा देवी ने बताया कि उनकी नानी का पक्का मकान पिछले साल घाघरा नदी के कटान में बह गया था, जिसके बाद वे सरयू नहर की पटरी किनारे रहने लगी थीं। सिंचाई विभाग के नियमों के चलते वहां पक्का मकान बनाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वे फूस के घर में रहने को मजबूर थीं। सुदामा देवी ने कहा, “पक्का मकान होता तो आज मेरी नानी जिंदा होतीं। फूलावती के पति प्रभु का पहले ही निधन हो चुका था। उनकी चार बेटियां गीता, कृष्णावती, रामावती और सुनीता शादीशुदा हैं जबकि बेटा सोहन राजस्थान में काम करता है। इसी वजह से फूलावती अकेली रहती थीं।

घटना जिला मुख्यालय से करीब 110 किमी दूर सुजौली थाना क्षेत्र की है। मामला दर्ज कर पुलिस और वन विभाग की टीमें इलाके में सक्रिय हैं।

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