प्रशासन के अल्टीमेटम का असर! फुलत मदरसे में चला बुलडोजर, खुद हटाया सरकारी जमीन से अतिक्रमण

प्रशासन के अल्टीमेटम का असर! फुलत मदरसे में चला बुलडोजर, खुद हटाया सरकारी जमीन से अतिक्रमण

मुजफ्फरनगर। खतौली तहसील क्षेत्र के फुलत गांव स्थित दारूल उलूम रहिमिया मदरसा एक बार फिर चर्चा में है। सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की शिकायत और राजस्व विभाग की जांच के बाद अब मदरसा प्रबंधन ने प्रशासन के निर्देश पर खुद ही चिह्नित सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को मदरसा परिसर में बुलडोजर और मजदूर दिनभर निर्माण और अन्य अवरोध हटाने में जुटे रहे। देर शाम तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रही।

बताया गया कि फुलत गांव में स्थित मदरसे की जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें प्रशासन के सामने आई थीं। शिकायतकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया था कि मदरसा परिसर के कुछ हिस्सों में सरकारी भूमि के अलावा कुएं, कब्रिस्तान से संबंधित जमीन और आम रास्ते की भूमि पर भी अतिक्रमण किया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए खतौली तहसील प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई।

राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों की जांच की। इसके साथ ही कागजात में दर्ज स्थिति का मौके पर मौजूद जमीन से मिलान किया गया। जांच के दौरान जिन हिस्सों को सरकारी भूमि के रूप में चिह्नित किया गया, उन्हें कब्जामुक्त कराने के निर्देश मदरसा प्रबंधन को दिए गए।

तहसील प्रशासन ने मदरसा प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि चिह्नित सरकारी भूमि से स्वयं अतिक्रमण हटा लिया जाए। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया था कि यदि प्रबंधन खुद अतिक्रमण नहीं हटाता है, तो प्रशासनिक टीम नियमानुसार सरकारी जमीन खाली कराने की कार्रवाई करेगी। इसके बाद मदरसा प्रबंधन ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय खुद ही चिह्नित हिस्सों को खाली कराने का काम शुरू कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते रविवार से मदरसा परिसर में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बुलडोजर की मदद से उन हिस्सों में बने निर्माण और अन्य अवरोध हटाए जा रहे हैं, जिन्हें राजस्व जांच के दौरान सरकारी भूमि के रूप में चिह्नित किया गया था। शनिवार को भी सुबह से ही मशीनरी और मजदूर मौके पर मौजूद रहे। पूरे दिन बुलडोजर से निर्माण हटाने का काम चलता रहा और देर शाम तक कार्रवाई जारी रही।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भी नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही। मौके पर दिनभर हलचल का माहौल रहा। प्रशासन और पुलिस की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी गई, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

धर्म परिवर्तन के आरोपों के बाद जमीन को लेकर भी बढ़ा था विवाद

फुलत का दारूल उलूम रहिमिया मदरसा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रहा है। इससे पहले मदरसे के मौलाना हफीजुर्रहमान और उनके बेटे के खिलाफ धर्म परिवर्तन के आरोपों में मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद मदरसे की जमीन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आने लगी थीं।

सरकारी भूमि पर कथित कब्जे की शिकायतों के बाद खतौली तहसील प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच शुरू की। स्थानीय शिकायतों में कुएं और उसके आसपास की भूमि को लेकर भी विवाद का उल्लेख किया गया था। कुछ हिंदूवादी संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से कुएं को धार्मिक महत्व वाला बताते हुए वहां पूजा किए जाने का दावा किया गया था। इसके अलावा आम रास्ते और कब्रिस्तान से संबंधित जमीन पर कथित अतिक्रमण के आरोप भी लगाए गए थे।

राजस्व विभाग की टीम ने इन शिकायतों के आधार पर मौके की स्थिति और उपलब्ध सरकारी अभिलेखों का मिलान किया। प्रशासन की जांच के बाद जिन हिस्सों को सरकारी भूमि के रूप में चिह्नित किया गया, उन्हें कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए गए।

अतिक्रमण हटने के बाद फिर मौके पर पहुंचेगी राजस्व टीम

मौजूदा कार्रवाई पूरी होने के बाद भी मामले की जांच समाप्त नहीं मानी जा रही है। खतौली तहसील प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाए जाने के बाद राजस्व विभाग की टीम दोबारा मौके का निरीक्षण करेगी। इस दौरान सरकारी अभिलेखों के आधार पर यह देखा जाएगा कि चिह्नित की गई पूरी सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटा दिया गया है या नहीं।

राजस्व टीम मौके पर भूमि की स्थिति का दोबारा मिलान करेगी। यदि किसी हिस्से में निर्माण या अन्य प्रकार का अतिक्रमण बाकी पाया जाता है, तो उसके संबंध में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य सरकारी भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त कराना और भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की स्थिति पैदा न होने देना है।

फिलहाल मदरसा प्रबंधन की ओर से स्वयं बुलडोजर चलाकर चिह्नित सरकारी भूमि को खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है। शनिवार देर शाम तक भी मशीनों और मजदूरों की मदद से निर्माण व अवरोध हटाने का काम जारी रहा। अब राजस्व विभाग की आगामी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चिह्नित सरकारी भूमि पूरी तरह कब्जामुक्त हुई है या नहीं।

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