पुणे में युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन की सोनम वांगचुक ने की सराहना, सरकार से की अपील

पुणे में युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन की सोनम वांगचुक ने की सराहना, सरकार से की अपील

पुणे। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पुणे में कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्‍होंने युवाओं की सक्रिय भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही की बढ़ती मांग की सराहना की है। उन्होंने कहा कि पुणे अब केवल एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी, सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने युवाओं की शांतिपूर्ण और सकारात्मक भूमिका को देश के लिए प्रेरणादायक बताया।

 

सोनम वांगचुक ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पुणे आकर उन्हें हमेशा सकारात्मक अनुभव मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले जब भी वे पुणे आए, उन्होंने यहां के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय रूप से काम करते देखा। कभी शहर के नागरिक पेड़ों को बचाने के लिए अभियान चलाते नजर आए तो कभी नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए। वांगचुक ने कहा कि इस बार पुणे में उन्हें एक नया और महत्वपूर्ण पहलू देखने को मिला, जहां युवा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को लेकर संगठित रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने पुणे के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और जवाबदेही की मांग के लिए उनका शांतिपूर्ण ढंग से एकजुट होना पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

 

उन्होंने सरकारों से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और जनसहभागिता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। वांगचुक ने कहा कि जहां भी नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि शांति और संवाद को प्रोत्साहित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है। यदि शांतिपूर्ण अभिव्यक्तियों को दबाया जाता है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है। सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे हिंसा और अशांति पर रोक लगाएं, लेकिन साथ ही शांतिपूर्ण आंदोलनों और रचनात्मक संवाद को समर्थन दें। समाज में सकारात्मक परिवर्तन संवाद, समझ और अहिंसक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। वांगचुक ने कहा कि शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण हमेशा उनके जीवन और कार्य का केंद्र रहे हैं।

 

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्यावरणीय संतुलन किसी भी राष्ट्र के सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्य और अहिंसा का मार्ग उनके विचारों और अभियानों की मूल प्रेरणा रहा है। मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए वांगचुक ने कहा कि समाचार माध्यमों को सत्य, निष्पक्षता और जनहित के सिद्धांतों पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मीडिया की स्वतंत्रता, सत्यनिष्ठा और जिम्मेदार पत्रकारिता जैसे विषयों पर भी चर्चा करें। वांगचुक ने कहा कि यदि भारत को वास्तव में वैश्विक स्तर पर एक आदर्श राष्ट्र और ‘विश्वगुरु’ के रूप में स्थापित होना है, तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र मीडिया और तथ्य आधारित संवाद को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि संचार माध्यमों पर किसी प्रकार का दबाव या अनावश्यक प्रभाव नहीं होना चाहिए।

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