नकली दूध-मावा बंद कराओ’… जानसठ में भाकियू (अराजनैतिक) का हल्ला बोल, SDM को ज्ञापन; शुक्रताल में अवैध कब्जों का मुद्दा भी उठाया

नकली दूध-मावा बंद कराओ’… जानसठ में भाकियू (अराजनैतिक) का हल्ला बोल, SDM को ज्ञापन; शुक्रताल में अवैध कब्जों का मुद्दा भी उठाया

जानसठ (मुजफ्फरनगर)। तहसील क्षेत्र में नकली एवं रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों की बिक्री के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को तहसील अध्यक्ष अंकित जावला के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ता जानसठ तहसील मुख्यालय पहुंचे और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की मांग की।

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में नकली दूध, मावा, पनीर, दही और मिलावटी सरसों के तेल की बिक्री का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है, जबकि मिलावटखोरी के कारण वास्तविक दुग्ध उत्पादक किसानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ज्ञापन में भाकियू (अराजनैतिक) ने कहा कि क्षेत्र में प्रतिदिन होने वाली दूध की खपत की तुलना में स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के पास उपलब्ध दूध की मात्रा काफी कम है। इसके बावजूद बाजारों में दूध, दही और मावे की आपूर्ति लगातार बनी हुई है। किसान नेताओं ने आशंका जताई कि मांग और उपलब्धता के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए सिंथेटिक और रसायनयुक्त पदार्थों से कृत्रिम दूध एवं मावा तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा है।

किसान नेताओं ने कहा कि यदि इन आरोपों की वास्तविकता सामने लानी है तो खाद्य सुरक्षा विभाग को क्षेत्र की डेयरियों, मिष्ठान प्रतिष्ठानों और अन्य खाद्य कारोबारियों की नियमित जांच करनी चाहिए। संगठन ने सरसों के तेल में भी मिलावट किए जाने का आरोप लगाते हुए तेल पेराई केंद्रों और बिक्री प्रतिष्ठानों की जांच कराने की मांग की।

भाकियू (अराजनैतिक) ने मांग की कि खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से तहसील क्षेत्र में सघन जांच और छापेमारी अभियान चलाया जाए। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जाए और जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

संगठन ने यह भी कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के साथ ही वास्तविक दुग्ध उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। किसान नेताओं के अनुसार मिलावटखोरी से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ने के साथ ही ईमानदारी से दूध का उत्पादन और बिक्री करने वाले किसानों के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।

शुक्रताल में अवैध निर्माण और वन भूमि पर कब्जे का मुद्दा उठाया

खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे के साथ ही भाकियू (अराजनैतिक) ने धार्मिक एवं पर्यटन स्थल शुक्रताल में कथित अवैध निर्माण और वन विभाग की भूमि पर कब्जे का मामला भी उठाया। तहसील अध्यक्ष अंकित जावला ने जिलाधिकारी को संबोधित एक अन्य ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि शुक्रताल क्षेत्र में वन विभाग की कीमती भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध रूप से कब्जे किए जा रहे हैं।

संगठन ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वन विभाग की भूमि की पैमाइश कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा यदि जांच में अवैध कब्जे पाए जाएं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक और सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाना जरूरी है।

बड़ी संख्या में किसान कार्यकर्ता रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान भाकियू (अराजनैतिक) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान संसार राठी, यशपाल राठी, आकाश चौधरी, राजीव सहरावत, विवेक राठी, नफीस मेम्बर और राधे श्याम त्यागी सहित कई किसान नेता मौजूद रहे। संगठन ने चेतावनी दी कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और सरकारी भूमि पर कथित कब्जों जैसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो किसान संगठन आगे भी अधिकारियों के समक्ष आवाज उठाएगा।

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