दिल्ली उच्च न्यायालय ने सत्येंद्र जैन को अयोग्य ठहराने संबंधी याचिका खारिज की

नयी दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन को ‘मानिसक रूप से अक्षम’ घोषित करने और इस आधार पर उन्हें विधायक एवं मंत्री पद के लिए अयोग्य ठहराने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि एक रिट याचिका में कही बातों के आधार पर जैन को ‘मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति’ घोषित नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें मंत्रिमंडल तथा विधानसभा से अयोग्य ठहराया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि ‘आप’ विधायक विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमे का सामना कर रहे हैं और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अदालत की है। अदालत ने 16 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘यह सच है कि प्रतिवादी नंबर पांच (जैन) भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के साथ ही धन शोधन रोकथाम कानून के तहत विभिन्न अपराधों के लिए मुकदमों का सामना कर रहा है। बहरहाल, तथ्य यही है कि दंड प्रक्रिया संहिता-1973 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जो पूछताछ, जांच और मुकदमे के संबंध में एक व्यवस्था उपलब्ध कराती है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘दंड प्रक्रिया संहिता में सभी आकस्मिकताएं शामिल हैं और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी अभियोजन/अदालत की है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘रिट याचिका में कही बातों के आधार पर यह अदालत भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायाधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रतिवादी नंबर पांच (जैन) को मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति घोषित नहीं कर सकती और न ही उन्हें विधानसभा या दिल्ली सरकार में मंत्री पद से अयोग्य ठहरा सकती है। इसके परिणामस्वरूप रिट याचिका खारिज की जाती है।’’

याचिकाकर्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जैन ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष ‘खुद घोषित किया है कि उन्होंने अपनी याददाश्त खो दी है’ और निचली अदालत को भी इसकी जानकारी दी गई है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *