तीन साल पहले आई बाढ़ में वहा आंचल कक्ष, अब परेशान हो रही हजारों माताएं

नर्मदापुरम। 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह 2022 मनाया जा रहा है। इसकी थीम स्तनपान शिक्षा और सहायता के लिए कदम बढ़ाना है। लेकिन शहर में सार्वजनिक स्थानों पर आंचल कक्षों की अनदेखी की जा रही है। वह भी ऐसे स्थानों पर जहां हर दिन हजारों की संख्या में माताएं अपने नवजात बच्चों के साथ पहुंचती है। लेकिन कक्ष नहीं होने के कारण उन्हे परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सेठानीघाट पर दिनभर में करीब 2 हजार श्रद्बालु नर्मदा स्नान के साथ दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या भी काफी रहती है। यहां पर तिलक भवन के पास प्लाई के पटिओं को जोड़कर आंचल कक्ष का आकार दिया गया था, लेकिन 2019 में आई बाढ़ के कारण यह खराब हो गए। इसके बाद इन्हे निकालकर रख दिया गया, जो अब तक नहीं लग सके।
इन्होंने बताई परेशानी: हरदा से परिवार के साथ नर्मदा स्नान करने आई रानी ने बताया कि उनका छोटा बच्चा है। इन दिनों घाट पर भीड़ काफी रहती है। आंचल कक्ष नहीं होने कारण यहां बने बुर्ज की ओट लेकर बच्चे को दूध पिलाया है।

संभागीय बस स्टैंड पर से करीब 350 बसों का आना-जाना होता है। इनमें हजारों की संख्या में नवजात बच्चों की माताएं रहती हैं। कई बार बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में यहां आंचलकक्ष नहीं होने के कारण इनकी परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में इनके लिए रेन बसेरा भेज दिया जाता है।
इन्होंने बताई परेशानी: बनखेड़ी जाने के लिए बस स्टैंड पर बैठी सावित्री ने बताया तलाश करने के बाद हमें आंचल कक्ष नहीं मिला। पूछताछ करने पर रेन बसेरा में जाने की जानकारी दी गई।

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