मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना तहसील के ऐतिहासिक गांव जोला में शराब के ठेके को लेकर हुई महापंचायत का असर महज दो दिनों में दिखाई दे गया। ग्रामीणों द्वारा गांव के बीच संचालित शराब के ठेके को हटाने के लिए प्रशासन को दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए ठेके को आबादी क्षेत्र से हटा दिया। इस निर्णय की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे सामूहिक एकजुटता, सामाजिक जागरूकता तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

हाल ही में गांव जोला में आयोजित विशाल महापंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया था। पंचायत में सर्वसम्मति से गांव के बीच संचालित शराब के ठेके को तत्काल बंद करने अथवा अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग उठाई गई थी। पंचायत में वक्ताओं ने कहा था कि घनी आबादी के बीच शराब का ठेका होने से गांव का सामाजिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है और इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने पंचायत में कहा था कि स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को ठेके के कारण असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को भी रोजाना आवाजाही में परेशानी होती है, जबकि नशे की प्रवृत्ति बढ़ने से गांव का माहौल प्रभावित हो रहा है। इसी को देखते हुए पंचायत ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर शराब का ठेका नहीं हटाया गया तो ग्रामीण बड़ा जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
महापंचायत के बाद ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और जनभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन और आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले ही प्रशासन ने गांव की आबादी के बीच संचालित शराब के ठेके को हटवा दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में उत्साह का माहौल बन गया।
ग्रामीणों के अनुसार जैसे ही ठेके पर ताला लगा और उसे वहां से हटाया गया, गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे सामाजिक हित में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे गांव का वातावरण बेहतर होगा, महिलाओं की सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और युवा पीढ़ी को नशे की प्रवृत्ति से बचाने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि यह निर्णय आने वाले समय में गांव के सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
ग्रामीणों ने इस सफलता का श्रेय भारतीय किसान यूनियन के जिला महासचिव अनुज बालियान और तहसील अध्यक्ष संजीव पवार को भी दिया। उनका कहना था कि दोनों नेताओं ने पंचायत में ग्रामीणों की आवाज को मजबूती से उठाया और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से पैरवी कर जनभावनाओं से अवगत कराया, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने त्वरित निर्णय लिया।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय रहते जनहित में उचित कदम उठाकर प्रशासन ने लोगों की भावनाओं का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज संगठित होकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांग उठाए तो उसका सकारात्मक परिणाम अवश्य निकलता है।

