जीवन को श्रेष्ठ बनाता है संयम: महेश शास्त्री

बिनौली: बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में पर्यूषण पर्व के पंचम दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म
की पूजा की।
इस अवसर पर पंडित महेश चंद शास्त्री ने कहा कि जीवन को दिशा बौध संयम प्रदान करता है। जिसके अभाव में इंद्रियां अनेक प्रकार की अलग अलग मांग करती है। स्पर्श इंद्रिय गद्दे, रचना इंद्रिय स्वाद, घ्राण इंद्रिय सुगंध, चक्षु इंद्रिय रूप चाहती है। कर्ण इंद्रिय स्वर संगीत चाहती है। जब इंद्रियों की अलग-अलग मांगों की पूर्ति इंसान करने लगता है, तब वह इनका गुलाम बन जाता है। जीव को अपनी शक्ति पहचान कर इंद्रियों का गुलाम नहीं बल्कि इनको अपना गुलाम बनाने का प्रयास करना चाहिए। इंद्रियों को गुलाम बनाने से भटकता मन स्वतः ही स्वयं में केंद्रित होने लगता है, जहां तक इंद्रियों की मांग है वहीं तक मन की दौड़ है। संयम जीवन को पापी बनने से रोकता है। हमेशा श्रेष्ठ को पकड़ने की ओर तथा अश्रेष्ठ को छोड़ने की बात करता है। इंद्रिय की आवश्यकता सदैव अश्रेष्ठ को पाने की रही है।

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