मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि राजनीति के प्रमुख केंद्र मुजफ्फरनगर में गुरुवार रात किसानों की बड़ी पंचायत ने एक बार फिर किसान मुद्दों को केंद्र में ला दिया। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में भारतीय किसान यूनियन की ओर से आयोजित किसान मजदूर महापंचायत में दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में किसान और मजदूर ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ पहुंचे। भाकियू की ओर से पहली बार रात के समय आयोजित की गई इस महापंचायत में देर रात तक किसानों की आवाज गूंजती रही और गन्ने के भाव का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा।

महापंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत समेत कई किसान नेताओं ने किसानों से जुड़े मुद्दे उठाए। मंच से किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के सामने विभिन्न मांगें रखी गईं। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 16 सूत्रीय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र भेजे जाने की बात कही गई।

गन्ने के भाव पर सबसे ज्यादा जोर
महापंचायत में गन्ने के भाव और बकाया भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाकियू ने नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग रखी। साथ ही चीनी मिलों पर किसानों के लंबित गन्ना भुगतान को ब्याज सहित तत्काल दिलाने की मांग की गई।
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गन्ना किसान घाटे में है। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन को अधिग्रहण के नाम पर कम कीमत में लिए जाने की शिकायतें हैं और सरकार को अन्नदाता का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन अभी तक गन्ने का मूल्य तय नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि गन्ने का भाव बढ़ना चाहिए और जमीन के सर्किल रेट भी बढ़ाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आलू, गन्ना और गेहूं का किसान परेशान है। उनके मुताबिक रात में पंचायत आयोजित करने का प्रयोग सफल रहा है और आगे वैचारिक क्रांति की बात किसानों के बीच रखी जाएगी। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को किसानों की ताकत बताया।
कर्जमाफी से लेकर मुफ्त बिजली तक मांग
महापंचायत में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण ऋण माफी योजना लागू करने की मांग की गई। इसके साथ ही ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई। कृषि कार्य के लिए निशुल्क बिजली तथा घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने की मांग भी उठाई गई।
किसान संगठन ने बिजली बिल 2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग रखी। डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सब्सिडी बहाल करने की मांग भी की गई।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
भाकियू ने सभी प्रमुख फसलों की लाभकारी कीमत पर पारदर्शी और मजबूत सरकारी खरीद व्यवस्था लागू करने की मांग की। फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद कानून बनाए जाने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही गई।
किसान संगठन ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल और पशुधन बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, भूस्खलन, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों, बंटाईदारों और कृषि मजदूरों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की गई।
श्रम संहिताओं और कृषि नीतियों पर भी उठाए सवाल
महापंचायत में किसानों और मजदूरों के हितों के विरुद्ध बताई गई चारों श्रम संहिताओं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति को वापस लेने की मांग रखी गई।
भाकियू ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते सहित ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों को स्वीकार नहीं करने की मांग की, जिनसे संगठन के अनुसार भारतीय कृषि, डेयरी, एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद और ग्रामीण रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाने की मांग भी की गई।
जमीन अधिग्रहण और ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा
महापंचायत में भूमि अधिग्रहण, बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई के दौरान किसानों और ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास की मांग उठी। भाकियू ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का सख्ती से पालन कराने, उचित मुआवजा देने, प्रभावित किसानों की सहमति सुनिश्चित करने तथा पुनर्वास और रोजगार के प्रावधान लागू करने की मांग की।
आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर बेबुनियाद मुकदमे वापस लेने की मांग भी की गई। डीजल, बीज, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की बढ़ती लागत पर प्रभावी रोक लगाने की मांग महापंचायत में रखी गई।
आवारा पशु, सिंचाई और फसल नुकसान भी एजेंडे में
किसानों ने आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। ग्राम स्तर पर व्यवस्था बनाने और गौशालाओं के नियमित संचालन की निगरानी की बात कही गई।
सिंचाई व्यवस्था को लेकर नहरों की सफाई, अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और बंद पड़े नलकूपों को चालू करने की मांग की गई। खाद और उर्वरकों की कालाबाजारी तथा जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठी।
मंडी व्यवस्था में पारदर्शी तौल, समयबद्ध भुगतान और बिचौलियों के शोषण पर रोक लगाने की बात कही गई। कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता देने की मांग भी सामने आई।
सोनाली नदी पर बांध और पुरकाजी को तहसील बनाने की मांग
महापंचायत में मुजफ्फरनगर के स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। खादर क्षेत्र में सोनाली नदी के उफान से होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते हुए नदी पर मजबूत बांध बनाने की मांग की गई। किसान नेताओं के मुताबिक बाढ़ के दौरान क्षेत्र के कई गांवों और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा पुरकाजी को अलग तहसील का दर्जा देने की मांग भी रखी गई। किसान नेताओं ने इसे क्षेत्र की प्रशासनिक जरूरत बताते हुए सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की मांग की।
राकेश टिकैत बोले, गलतफहमी में न रहे सरकार
महापंचायत में चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार को आंदोलन जारी रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 23 अक्तूबर को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर पंचायत आयोजित की जाएगी। प्रदेश में सिलसिलेवार किसान पंचायतें किए जाने की बात भी कही गई।
राकेश टिकैत ने किसानों से खेती की लागत कम करने और जमीन बचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सस्ते दूध का लालच देकर पशुधन खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने 2047 तक जमीन छिनने की आशंका जताते हुए किसानों से खर्च कम कर जमीन बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, लेकिन इसके लिए सही तरीके अपनाने होंगे। उनके अनुसार गन्ने का भाव 500 से 600 रुपये के आसपास होना चाहिए।
मस्जिद प्रकरण और अस्पतालों के मुद्दे पर भी बोले टिकैत
महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने सहारनपुर के मस्जिद प्रकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब देश आंदोलन से बचेगा। उन्होंने रामपुर की यूनिवर्सिटी और मेरठ में अस्पताल तथा बाजार से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों में उपचार कराना आम लोगों के लिए आसान नहीं है और छोटे अस्पतालों को मजबूत किए जाने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों को शहरों में भेजने के बजाय गांवों के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को खुद को बचाने के लिए अपने खर्चों में कमी करनी होगी।
नरेश टिकैत बोले, सरकार किसान की बात सुने
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन सरकार को भी किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गन्ने का मूल्य घोषित किया जाना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से किसानों को गन्ने के मूल्य के रूप में राहत देने की मांग की।
उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश शर्मा ने भी महापंचायत को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को कमजोर करने के प्रयास होते रहे हैं। उन्होंने चीनी के बढ़ते दाम और गन्ने के मूल्य के बीच अंतर का मुद्दा उठाया।
सुबह तक चला किसानों का जमावड़ा, शहर में लगा जाम
रात के समय आयोजित महापंचायत के चलते जीआईसी मैदान और महावीर चौक के आसपास किसानों के ट्रैक्टर ट्रॉलियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। भाकियू के हरे झंडों से पूरा क्षेत्र नजर आया। किसानों के वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ महावीर चौक, जानसठ पुल और आर्य समाज रोड पर यातायात प्रभावित हुआ।
पुलिस ने पंचायत को देखते हुए शाम से ही महावीर चौक की ओर बड़े वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया था। बिजनौर, मुरादाबाद और मीरापुर जाने वाली रोडवेज बसों को जानसठ फ्लाईओवर के पास से तथा दिल्ली, मेरठ और बागपत की बसों को राणा चौक से संचालित किया गया। इसके बावजूद रात में किसानों के वाहन बड़ी संख्या में पहुंचने पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस को जाम खुलवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान
सुबह तक चली महापंचायत के समापन पर भाकियू नेताओं ने कहा कि किसानों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठन ने संकेत दिया कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसान पंचायतों का सिलसिला आगे बढ़ाया जाएगा। लखनऊ के गन्ना भवन पर 23 अक्तूबर को प्रस्तावित पंचायत को इसी क्रम की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

