जन्माष्टमी के दिन करें ये काम, संसार की सारी खुशियां होंगी आपके पास

ज्योतिष विज्ञान में स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है कि विशेष दिन, समय और स्थान पर किया गया दान, भजन, भंडार और उपाय का प्रभाव भी विशेष एवं बहुगुणा होता है। सनातन विज्ञान में चार रात्रियों को बहुत ही अधिक महत्व दिया गया है। माना जाता है कि यदि आप अपना कोई भी कार्य हल करना चाहते हैं तो इन चार रातों को कोई भी उपाय करके उसके बहुगुणा प्रभाव को प्राप्त किया जा सकता है। यह चार रात्रियां इस तरह से हैं कालरात्रि (नरक चतुर्दशी या दीपावली), अहोरात्रि (शिवरात्रि), दारूणरात्रि (होली) और मोहरात्रि यानि कि जन्माष्टमी। यह जन्माष्टमी श्री हरि विष्णु के नौंवे अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रीकृष्ण भगवान का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय मथुरा नगरी में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी का त्यौहार, व्रत एवं पूजा का दिन 19 अगस्त 2022 ही है।

इस दिन अगर हम कई प्रकार के उपायों का अनुसरण करें तो हमारे जीवन की कई प्रकार की समस्याएं दूर होकर सभी प्रकार की मानवीय जीवन की खुशियों को प्राप्त किया जा सकता है।

धन धान्य की प्राप्ति हेतु- इस दिन दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरकर भगवान श्री कृष्ण को स्नान करवाने से माता लक्ष्मी की प्रसन्नता को प्राप्त किया जा सकता है तथा साथ में श्री शुक्ले महाशुक्ल मंत्र का जाप पूर्ण विधि से करना चाहिए तथा प्रतिदिन जाप करते रहना चाहिए। जिसके प्रभाव से लक्ष्मी की प्राप्ति एवं स्थायित्व प्राप्त होता है।

अनावश्यक संघर्ष को दूर करने के लिए- इस रात ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप पूर्ण विधी से कम से कम 11 माला करनी चाहिए तथा इसके पश्चात प्रतिदिन गजेन्द्र मोक्ष का पाठ दिन में कोई भी समय निर्धारित करके करना चाहिए। इस महाउपाय को करने से पहले श्री हरि विष्णु को प्रार्थना करनी चाहिए, हे प्रभु ! जिस प्रकार से आपने गज को मगर के मुख से मुक्त करके उसके सभी संकटों को हर कर उस पर कृपा करी, वैसे ही मेरे जीवन के भी सभी संकटों को हरने की कृपा करें।

पारिवारिक सुख शांति के लिए – इस रात को ऊँ सर्व मंगल मांग्लयै शिवे सर्वार्थ साधिके !! !!शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते इस मंत्र का जाप पूर्ण विधि से करना चाहिए तथा प्रतिदिन घर में किसी भी नारी के द्वारा इसका जाप करवाने से घर में सभी प्रकार के कलेश धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे और हर तरह के सुखों की प्राप्ति होगी तथा पारिवारि सुखों में वृद्धि होगी।

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