नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बंद करने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने को सहमत हो गया है। उच्च न्यायालय आज ही इस याचिका पर सुनवाई करेगा।

आज याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए तुरंत सुनवाई करने की मांग की। मेंशंनिंग के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकार ने जंतर-मंतर के आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अचानक निलंबित करने का आदेश दिया है। ऐसा करना पूरी तरह से मनमाना, गैरकानूनी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनों के मद्देनजर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय आज सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट इस मामले पर आज दोपहर बाद सुनवाई करेगा।
पिछले पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर पिछले कुछ दिनों से छात्रों का लगातार प्रदर्शन जारी हैं। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए एहतियाती कदम के तहत दूरसंचार अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत जंतर-मंतर के डेढ़ किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश जारी किए थे। यह प्रतिबंध शाम से लेकर देर रात तक प्रभावी रहा, जिसके कारण जंतर-मंतर के अलावा कनॉट प्लेस और मंडी हाउस तक के इलाकों में मोबाइल डेटा सेवाएं प्रभावित हुईं।
याचिका में कहा गया है कि इंटरनेट सेवाओं के इस तरह बार-बार ठप होने से आम जनता, स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और पेशेवर कामगारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में केंद्र सरकार के आदेश को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार पर उल्ल्घंन बताया गया है।

