‘चकरोड खाली कराओ, परिवार बचाओ’- मुजफ्फरनगर में सरकारी जमीन के कब्जे के विवाद पर गरमाया मामला, परिवार को धमकाने का आरोप

‘चकरोड खाली कराओ, परिवार बचाओ’- मुजफ्फरनगर में सरकारी जमीन के कब्जे के विवाद पर गरमाया मामला, परिवार को धमकाने का आरोप

मुजफ्फरनगर। कोतवाली नगर क्षेत्र के गांव शेरपुर में सरकारी भूमि पर दर्ज चकरोड से कथित कब्जा हटाने की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। चकरोड से कब्जा हटाने की मांग कर रहे गांव निवासी हमीदुल्ला ने जिला मुख्यालय स्थित मीडिया सेंटर पहुंचकर पत्रकारों से बातचीत की और अपने परिवार के साथ कथित तौर पर हो रही घटनाओं की जानकारी दी। हमीदुल्ला ने कुछ लोगों पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने, अपहरण कराने तथा उनकी बेटियों को बदनाम करने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।

हमीदुल्ला का कहना है कि सरकारी रास्ते से कथित कब्जा हटाने की मांग करने के बाद से ही उनके परिवार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अलावा मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।

चार खसरा नंबर चकरोड के रूप में दर्ज होने का दावा

मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हमीदुल्ला पुत्र याहिया ने बताया कि ग्राम समाज शेरपुर की भूमि के खसरा नंबर 924, 936, 835 और 842 राजस्व अभिलेखों में चकरोड के रूप में दर्ज हैं। उनका आरोप है कि इन सरकारी भूमि पर गांव के कुछ लोगों ने कथित तौर पर कब्जा कर रखा है।

हमीदुल्ला ने जाकिर, जाबिर, उस्मान, अनीस, हसन, फुरमान और इरफान समेत कई लोगों पर कथित कब्जे में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा उन्होंने लेखपाल भूपेंद्र सिंह और ग्राम प्रधान पर भी कथित कब्जे में मिलीभगत और आर्थिक लेनदेन के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पहले भी चकरोड से संबंधित मामले को लेकर अधिकारियों को शिकायतें दी थीं। उनका दावा है कि शिकायतों के बावजूद सरकारी रास्ते से कथित कब्जा नहीं हटाया गया।

मारपीट और दस्तावेज ले जाने का आरोप

हमीदुल्ला ने बताया कि 26 अक्टूबर 2025 को उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और लूटपाट की घटना हुई थी। उनका आरोप है कि उनकी दुकान और मकान से संबंधित बैनामे के मूल दस्तावेज भी जबरन ले लिए गए थे। घटना के अगले दिन उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी थी।

हमीदुल्ला के अनुसार उनकी शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर जांच की गई थी। इसके बाद गांव के कुछ संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस दौरान कथित कब्जाधारियों ने गलती स्वीकार करते हुए चकरोड को खाली करने का आश्वासन दिया था।

आरोप है कि समझौते के बावजूद चकरोड से कब्जा नहीं हटाया गया। हमीदुल्ला का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित लोगों, ग्राम प्रधान और लेखपाल से समझौते के अनुसार रास्ता खाली कराने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई।

लाठी डंडे और हथौड़े लेकर घर पहुंचने का आरोप

हमीदुल्ला के अनुसार चकरोड खाली कराने की मांग करने पर विवाद और बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके परिवार को गांव से निकालने, जमीन, मकान और दुकान पर कब्जा करने तथा झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जाने लगीं।

शिकायतकर्ता ने 21 अगस्त 2026 की एक घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सुबह करीब 11 बजे ग्राम प्रधान सहित कई लोग एकराय होकर लाठी डंडे, छीनी और हथौड़े लेकर उनके मकान पर पहुंचे। आरोप है कि घर के बाहर पहुंचने के बाद लोगों ने गाली गलौज करते हुए उन्हें बाहर निकलने के लिए ललकारा।

हमीदुल्ला का दावा है कि इस दौरान आरोपियों ने चकरोड को लेकर शिकायत करने का अंजाम भुगतने की धमकी दी और उनके साथ कथित तौर पर अभद्रता की। उन्होंने घर में जबरन घुसने तथा उन्हें और उनकी पत्नी को बाहर खींचने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया है।

दुकान के ताले तोड़ने और तोड़फोड़ का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उनकी दुकान पर भी कब्जा करने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार दुकान के ताले तोड़ने और तोड़फोड़ की कोशिश की गई। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और बीच बचाव किया, जिसके बाद आरोपी वहां से चले गए।

हमीदुल्ला का कहना है कि यदि आसपास के लोग समय पर मौके पर नहीं पहुंचते तो उनके और उनके परिवार के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जाते समय आरोपियों ने उन्हें, उनकी पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी।

बेटियों को लेकर भी धमकाने का आरोप

मामले में हमीदुल्ला ने अपनी बेटियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आरोपी उनकी बेटियों के अपहरण और उन्हें बदनाम करने की धमकी दे रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार बेटियों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने तथा उनके विवाह में बाधा डालने की धमकियां भी दी गईं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस या थाने में शिकायत करने पर परिवार के सदस्यों का अपहरण कर हत्या करने की धमकी दी गई। इन आरोपों के चलते परिवार के लोगों में भय का माहौल होने का दावा किया गया है।

एसएसपी से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग

हमीदुल्ला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।

उन्होंने राजस्व विभाग से चकरोड की पैमाइश कराकर सरकारी रास्ते को कथित कब्जे से मुक्त कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि चकरोड सार्वजनिक उपयोग के लिए है और इसे कब्जामुक्त कराया जाना जरूरी है।

फिलहाल मामला पुलिस और राजस्व विभाग की जांच से जुड़ा है। चकरोड पर कथित कब्जे, पूर्व में हुए विवाद, तोड़फोड़, धमकी और अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। संबंधित आरोपित पक्ष और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और साफ होगी।

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