चंद दौलत के लिए पहले दरिंदो ने महिला को बीच खेत में जिंदा जलाया फिर तड़पते हुए मदद मांगने का बनाया VIDEO

मध्य प्रदेश के गुना शहर से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। दरअसल, यहां के कुछ लोगों ने पहले एक आदिवासी महिला को जिंदा जलाया फिर उसका वीडियो बना सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सामने आई जानकारी के मुताबिक 38 साल की महिला को कुछ लोगों ने डीजल डाल कर उसे जिंदा जला दया और फिर उसका तड़पते हुए का वीडियो भी शूट किया।

वहीं, आदिवासी महिला को कथित तौर पर आग लगा कर मारने का प्रयास करने की साजिश में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पीड़ित महिला को गंभीर हालत में भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार को बताया कि घटना जिले के बमोरी थाना क्षेत्र के धनोरिया गांव में शनिवार दोपहर की है। इस सिलसिले में पुलिस ने अब तक दो महिलाओं सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुविभागीय अधिकारी युवराज सिंह ने बताया कि पीड़ित महिला रामप्यारी बाई (45) की हालत गंभीर बनी हुई है। भोपाल के सरकारी हमीदिया अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। आरोपियों द्वारा कथित तौर पर बनाया गया एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें जली हालत में महिला दर्द से रोती दिखाई दे रही है और उसके चारों ओर धुंआ है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को यह कहते सुना गया कि महिला ने स्वयं को आग लगा ली है और ‘चलो वीडियो शूट करते हैं’। गुना के पुलिस अधीक्षक पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि महिला के पति अर्जुन सहरिया ने एक पुलिस शिकायत में कहा था कि जब वह शनिवार दोपहर अपने खेत में पहुंचा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी वहां जली हुई हालत में पड़ी है।

अधिकारी ने बताया कि जब उसने पत्नी से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि प्रताप धाकड़ (35), श्याम धाकड़ (35) और हनुमत धाकड़ (25) नाम की तीन लोगों ने उसे आग लगा दी। उन्होंने बताया कि घटना की सिलसिले में रविवार को तीन पुरुषों और दो महिलाओं अवंती बाई (50) और सुदामा बाई (35) को गिरफ्तार किया गया है। एसपी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ भादंवि की धारा 307 (हत्या का प्रयास) सहित भादंवि और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने शिकायतकर्ता के हवाले से बताया कि आरोपियों ने जबरन उसकी जमीन हड़प ली थी जिस स्थानीय प्रशासन ने इस साल मई माह में मुक्त कर अर्जुन सहरिया सौंप दिया था।

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