ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के छात्रों को मधुमक्खी की विभिन्न अवस्थाओं की जानकारी दी

ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के छात्रों को मधुमक्खी की विभिन्न अवस्थाओं की जानकारी दी

मुजफ्फरनगर (मो० सुहैल) चौधरी छोटू राम महाविद्यालय मुजफ्फरनगर में प्राचार्य डॉक्टर नरेश कुमार के निर्देशन में बी एससी कृषि ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव, RAWE के छात्रों को फ़ील्ड विज़िट के तहत मधुमक्खी की विभिन्न अवस्थाओं की जानकारी दी । किट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (इकाई -३) के कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर जॉनी कुमार ने सभी छात्रों को मधुमक्खी की विभिन्न अवस्थाओं जैसे अण्डा, लारवाँ, कर्मिकोष तथा प्रोड़ की पहचान की विस्तृत जानकारी दी I इन्होंने बताया की मधुमक्खी का अण्डा सफ़ेद रंग का होता जो दिखने में चावल के दाने के जैसा होता ह । मधुमक्खी के द्वारा जब अण्डा दिया ह तो वह सेल के अंदर सीधा खड़ा रहता ह ओर जैसे जैसे वह फूटने की ओर बड़ता ह तो वह तिरछा हो जाता ह । अण्डे से सफ़ेद रंग की लारवा निकलता जो बाहर से देखने पर “सी” के आकर मे मुड़े रहते ह ।लारवा अंत में कर्मिकोष अवस्था में बदलता ह । कर्मिकोष के सेल बाहर से बंद रहती ह जिसे देखकर आसनी से पहचाना जा सकता ह। नर मक्खी की सेल ऊपर की तरफ़ से उठी हुई प्रतीत होतीं ह । रानी मक्खी की सेल आकर में बड़ी होती ह । इन्ही बन्द सेलों से प्रोड़ मक्खी बाहर निकलती ह । छात्रों में नीतेश गंगवार, सुरेश कुमार, परमजीत, मोहित कुमार, पवन कुमार, रजकान्त, एवं गायत्री ने मधुमक्खी की विभिन्न अवस्थाओं की पहचान करना सीखा।

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