भोपाल। कान्हा नेशनल पार्क से वन विहार लाई गई बाघिन सुंदरी शुक्रवार को अपने बाड़े में गुमसुम रही। वे चार घंटे तक एक स्थान से नहीं हिली। वैसे भी सुंदरी को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि जब सुंदरी खुले जंगल में रहती थी उस समय भी उसकी रुचि खाना तलाशने में कम रहती थी, वह थोड़ी आलसी है।
इंसानी एरिया के नजदीक उसकी ज्यादा उपस्थिति देखने के बाद उसे बाड़े में रखा गया, अब वन विहार भेजा गया है। यहां उल्टा होगा उसे इंसान देखने आएंगे, ऐसे में उसकी क्या प्रतिक्रिया रहेगी इस पर भी एक्सपर्ट निगाह रखेंगे। मंडला से भोपाल की दूरी करीब 12 घंटे है, बरसात के मौसम में उसे वहां से लाया गया है। सुंदरी ने शुक्रवार को थोड़ा खाना भी खाया।

वन विहार के अफसरों ने बताया कि जब कोई नया जीव वन विहार में आता है तो उसे डीप ऑब्जर्वेशन में रखा जाता। इसके अवधि 21 दिनों की होती हैं। कुछ दिन तनाव कम करने में ही लग जाते हैं। सुंदरी तनाव में है इसलिए उसे खाना देने में भी विशेष सावधानी बरती जा रही है।

सामान्यत: जीवों के लिए 1000 वर्गफीट की जगह में रहने की व्यवस्था होती है लेकिन जो नए जीव होते उन्हें आठ वाई आठ के बाड़े में रखा जाता है। इसकी वजह जानवरों ज्यादा स्वतंत्र महसूस कर भाग दौड़ ना करें। वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार जैन ने बताया कि सुंदरी पर निगरानी रखी जा रही है। एक एक मूवमेंट को नोट किया जा रहा है।
इससे पहले कान्हा टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन सुंदरी का घर पिछले ही दिनों राजधानी का वन विहार नेशनल पार्क बना है। इसे बुधवार 13 जुलाई की देर रात उसे वन विहार में शिफ्ट कर दिया गया। यहां उसे अलग हाउसिंग में रखा गया, जहां उसके आसपास दूसरे बाघों के बाड़े नहीं हैं। सुंदरी को यहां विशेष वाहन में सड़क मार्ग से लाया गया है, जिसके कारण वह थकी होने के साथ ही व्यवहार में आक्रामक दिखी।
बाघिन सुंदरी को कान्हा टाइगर रिजर्व से वन विहार में शिफ्ट करने की योजना लंबे समय से चल रही थी। इसके तहत बुधवार दोपहर में उसे कान्हा व पेंच रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सकों ने बेहोश किया। फिर स्वास्थ्य संबंधी जांचें की थी, जिसमें वह फिट पाई गई थी। इसके बाद उसे पिंजरे में बंद कर दोपहर में वन विहार नेशनल पार्क भोपाल के लिए रवाना कर दिया था। कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एसके सिंह ने इसकी पुष्टि की थी।