कांवड़ यात्रा में बढ़ते दिखावे पर राकेश टिकैत ने जताई चिंता, बोले- आस्था को प्रतियोगिता न बनाएं श्रद्धालु

कांवड़ यात्रा में बढ़ते दिखावे पर राकेश टिकैत ने जताई चिंता, बोले- आस्था को प्रतियोगिता न बनाएं श्रद्धालु

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कांवड़ यात्रा के बदलते स्वरूप को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था और श्रद्धा से जुड़ी कांवड़ यात्रा अब धीरे-धीरे प्रतिस्पर्धा का रूप लेती जा रही है। गंगाजल के अधिक वजन को लेकर युवाओं में हो रही होड़ पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

राकेश टिकैत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि सावन शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकल चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई श्रद्धालु 100, 151, 251 लीटर और इससे भी अधिक मात्रा में गंगाजल लेकर यात्रा कर रहे हैं। जबकि भगवान शिव की आराधना के लिए इतना अधिक वजन उठाने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि पहले श्रद्धालु सवा लीटर गंगाजल लेकर भी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ यात्रा पूरी करते थे, लेकिन अब कई जगहों पर ज्यादा वजन उठाने को लेकर एक तरह की प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है। यह आस्था से ज्यादा दिखावे की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

भाकियू नेता ने कहा कि अधिक वजन उठाने से युवाओं के शरीर पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। कमर, घुटनों और अन्य शारीरिक समस्याओं से कई कांवड़ियों को जूझना पड़ता है। कई बार रास्ते में श्रद्धालुओं को सहारा देकर चलाना पड़ता है और कुछ मामलों में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल तक ले जाने की स्थिति बन जाती है।

राकेश टिकैत ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि यदि ताकत दिखाने या वजन उठाने की प्रतियोगिता करनी है तो जिम में करें, लेकिन कांवड़ यात्रा को वजन उठाने की होड़ न बनाएं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कम वजन की कांवड़ लेकर श्रद्धा और अनुशासन के साथ यात्रा करने की अपील की।

उन्होंने भारतीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘सवा’ का विशेष महत्व रहा है। शुभ कार्यों में सवा रुपये देने की परंपरा रही है और इसी तरह पहले श्रद्धालु सवा लीटर गंगाजल लेकर यात्रा करते थे। इस परंपरा को बनाए रखने की जरूरत है।

राकेश टिकैत ने 10 जुलाई को मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर हुई घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर कांवड़ यात्रा का प्रमुख पड़ाव है, जहां से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली सहित कई राज्यों के लाखों श्रद्धालु गुजरते हैं। ऐसे में प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि यात्रा के दौरान भाईचारा और सौहार्द का माहौल बना रहे।

उन्होंने आशंका जताई कि कुछ असामाजिक तत्व यात्रा के दौरान माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए सभी लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की जरूरत है।

भाकियू नेता ने प्रशासन से कांवड़ मार्गों पर लगने वाले भंडारों की अनुमति प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुराने और नियमित रूप से संचालित भंडारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि नए भंडारों को जांच-पड़ताल के बाद ही अनुमति दी जाए।

राकेश टिकैत ने कहा कि कांवड़ यात्रा श्रद्धा, सेवा, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है। इसे दिखावे, प्रतिस्पर्धा और विवाद का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावना का सम्मान बना रहे।

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