पैगंबर। पैगंबर पर बीजेपी नेताओं के बयान के खिलाफ उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन ये मुद्दा खासकर मुस्लिम देशों के मंच से उठा। पाकिस्तान ने भी ये मुद्दा उठाया तो भारत ने दो टूक शब्दों में उसे आईना दिखाया। भारत की ओर से अपना स्टैंड साफ करने के बावजूद पाकिस्तान समेत यूएई, जॉर्डन, सऊदी, बहरीन और अफगानिस्तान ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता के विवादित बयान की कड़ी निंदा की है। इससे पहले कतर, कुवैत और ईरान ने विरोध किया था। पैगंबर पर नुपुर शर्मा के बयान के खिलाफ कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कानपुर में तो हिंसा तक हो गई। बात जब खाड़ी देशों तक पहुंची तो बीजेपी ने कार्रवाई की।

प्रमुख पश्चिम एशियाई व्यापारिक भागीदारों ने एक टीवी बहस के दौरान पार्टी के प्रवक्ता द्वारा कथित इस्लामोफोबिक टिप्पणी के बाद देश के राजनयिक दूतों को तलब किया। खाड़ी क्षेत्र में भारतीय उत्पादों के बहिष्कार के बढ़ते सोशल मीडिया आह्वान के बीच भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को एक प्रवक्ता को निलंबित कर दिया और दूसरे को निष्कासित कर दिया।

पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान पाने वाले ओमान के ग्रैंड मुफ्ती शेख अहमद बिन हमाद अल खलीली ने बीजेपी के खिलाफ मुहिम की शुरुआत की। ग्रैंड मुफ्ती ने ट्वीट किया कि भारत की सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता ने इस्लाम के दूत के खिलाफ एक ढीठ और अपमानजनक टिप्पणी की है। ये एक ऐसा मामला है जिसके खिलाफ दुनिया भर के मुस्लिमों को एक साथ आना चाहिए।
संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इराक 2021-22 में भारत के तीसरे, चौथे और पांचवें सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार हैं। खाड़ी देशों में लगभग 76 लाख भारतीय काम करते हैं। ये अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भारत भेजते हैं जो देश के विदेशी पूंजी का भंडार बढ़ाने में मदद करता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का 84 प्रतिशत तेल आयात करता है। इनमें करीब 52 प्रतिशत तेल इन्हीं खाड़ी देशों से आयात किया जाता है। 2021-22 में, भारत ने सात खाड़ी देशों-सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और इराक के साथ लगभग 189 बिलियन डॉलर का कुल व्यापार दर्ज किया, जो इसके आयात के संयुक्त मूल्य का 18.3% था।
भारत के लिए मिडल ईस्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम इलाका है। भारत के एक्सटेंडेड नेबरहुड का हिस्सा है। पिछले आठ के मोदी सरकार के कार्यकाल को देखें तो विदेश नीति के मामले में पीएम मोदी की बड़ी सफलता इस मामले में रही कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने में सफल रहे। मिडल ईस्ट में अगर आप देखें तो भारत ने सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए। पीएम ने भी इन देशों का दौरा किया और उच्च स्तर पर रिश्ता बेहतर भी हुआ है। जब भारत ने अनुच्छेद 370 हटाया था, उस समय भी सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों की प्रतिक्रिया बहुत शांत थी। यह भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता थी।
