तेहरान। ईरान के दक्षिण-पश्चिमी खुजेस्तान प्रांत में रविवार सुबह 5.0 तीव्रता का भूकंप आने से प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। भूकंप के झटके महसूस होते ही राहत एवं बचाव एजेंसियों को सक्रिय कर प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजी गईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ईरान के सरकारी मीडिया और तेहरान विश्वविद्यालय के भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप का केंद्र खुजेस्तान प्रांत के सरंद क्षेत्र के पास था और इसकी गहराई लगभग 12 किलोमीटर दर्ज की गई। खुजेस्तान के गवर्नर सैयद मोहम्मद रजा मौलाइजादेह ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दल तैनात कर दिए गए हैं।

इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि ईरान के खिलाफ लगातार आठवीं रात भी हवाई हमले किए गए। उनके अनुसार यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई और इसकी मंजूरी उन्होंने स्वयं दी थी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों में जॉर्डन में हुए हमले से जुड़े समूहों के ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया।
वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ एक महीने पहले हुए समझौते से पीछे हटने की घोषणा कर दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले समझौते का उल्लंघन किया, इसलिए अब ईरान भी उसकी शर्तों का पालन नहीं करेगा।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 27 जून से 18 जुलाई के बीच अमेरिकी हवाई हमलों में 50 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संघर्ष के बीच दोनों पक्ष एक-दूसरे के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले के दावे भी कर रहे हैं। कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान ने उसके एक डिसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जबकि ईरान का कहना है कि अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में स्थित एक डिसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों में बंदर अब्बास-रूदान मार्ग पर स्थित दो पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं और जस्क के पास भी सैन्य कार्रवाई की गई है।
दूसरी ओर ईरानी सेना ने दावा किया है कि जवाबी कार्रवाई में उसने कुवैत के कैंप अल-उदेरी स्थित अमेरिकी सैन्य गोला-बारूद डिपो तथा अली अल-सलेम एयर बेस पर मौजूद पैट्रियट रडार और एयर सर्विलांस रडार को ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार अमेरिकी सेना ने क़ेश्म द्वीप के निकट भी हमला किया। एजेंसी का दावा है कि इस हमले में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ और न ही किसी रिहायशी या व्यावसायिक ढांचे को नुकसान पहुंचा।
बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पिछले तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के अनुसार हाल के दिनों में इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
इसी बीच इराक ने भी तेल निर्यात के वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इराक के तेल मंत्री बसीम मोहम्मद खुदैर ने बताया कि सरकार बसरा से किरकुक होते हुए तुर्किये के सेहान बंदरगाह और सीरिया के बनियास तक नई रणनीतिक तेल पाइपलाइन बिछाने की योजना पर अध्ययन कर रही है। इसका उद्देश्य तेल निर्यात के लिए केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करना है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी दुनिया भर में रह रहे और यात्रा कर रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। मंत्रालय ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा स्थिति के अचानक बिगड़ने की आशंका जताई है।
उधर भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भूकंप संभावित क्षेत्र में आता है। देश के अनेक बड़े शहर सक्रिय फॉल्ट लाइनों के पास बसे हैं, जिससे मध्यम तीव्रता के भूकंप भी व्यापक असर छोड़ सकते हैं। वर्ष 2003 में बाम शहर में आए 6.6 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में 26 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जिसे ईरान के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।

