आने वाले 4 माह ऋषि व कृषि के लिए हैं महत्वपूर्ण : विहर्ष सागर महाराज

गुडग़ांव। आने वाले 4 माह ऋषि व कृषि के लिए महत्वपूर्ण
हैं। इन 4 माह में जमीन को पानी की और भक्तों को ऋषियों की पाणी की
आवश्यकता होती है। सभी को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उक्त उद्गार सैक्टर
4 स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में राष्ट्र संत विहर्ष सागर महाराज ने प्रवचन
करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम सभी को ऋषियों के कर्मों व उनके
दिखाए रास्ते का अनुसरण करना चाहिए ताकि हम अपने जीवन काल में स्वयं को
निखार सकें। उन्होंने कमजोर और मजबूत व्यक्ति के बीच भेद बताते हुए कहा
कि कमजोर व्यक्ति अक्सर बदला लेने की सोचता है, जबकि मजबूत और बुद्धिमान
व्यक्ति क्षमा करने की सोच रखता है। हम अपना जीवन नेकी, भलाई के कार्यों
में लगाना चाहिए। महाराज जी ने कहा कि समाज में पथप्रदर्शक बनना है तो
सत्य का मार्ग अपनाना होगा। संतों द्वारा बताए गए नियमों व उनकी सोच के
अनुरूप अगर हम कार्य करेंगे तो जीवन में कठिनाइयां नहीं आएंगी। उन्होंने
कहा कि आकर्षण तो अस्थायी होता है। जबकि समर्पण स्थायी और अच्छे परिणाम
देने वाला होता है। इसलिए स्वयं को इतना मजबूत बनाएं कि हम किसी के प्रति
समर्पित हों सकें। समर्पण भगवान के प्रति और इंसान के प्रति भी होना
चाहिए। जिम्मेदार होने पर व्यक्ति घर, समाज, देश के बारे में बेहतर काम
करने की ही सोचता है। इस अवसर पर मुनि विजयेश सागर महाराज, विनिबोधरासागर
महाराज व विनियोगसागर महाराज भी मौजूद रहे। जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन
ने बताया कि विहर्ष सागर महाराज का चातुर्मास इस वर्ष गुरुग्राम में
होगा। कल मुनिश्री अपने अन्य संतों के साथ जैकबपुरा स्थित दिगम्बर जैन
पाश्र्वनाथ मंदिर में मंगल प्रवेश करेंगे। आगामी 17 जुलाई को भव्य कलश
स्थापना होगी। कार्यक्रम में जैन समाज के योगेश जैन, ऋषभ जैन, उत्तम जैन,
सतीश जैन, रवीन जैन, टीसी जैन, केके वोहरा आदि शामिल रहे।

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