गुडग़ांव। फ्लोरेन्स नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता माना जाता है। दया व सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल द लेडी विद द लैंप के नाम से भी जानी जाती हैं। उच्च कुल में जन्म लेने के बाद भी फ्लोरेंस ने मानव सेवा का मार्ग चुना और उन्होंने अभावग्रस्त लोगों की सेवा का व्रत भी लिया। उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को सुधारने व बनाने का कार्य शुरु किया था। उनका जन्म 12 मई 1820 को हुआ था। उक्त उद्गार वरिष्ठ श्रमिक नेता कुलदीप जांघू ने फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि फ्लोरेंस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रीमिया के युद्ध में रहा। जब चिकित्सक चले जाते थे तो वह रात के गहन अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर घायलों की सेवा के लिए तत्पर रहती थी। घायलों सेवा सुश्रुषा के दौरान वह गंभीर रुप से संक्रमित हो गई थी। उन्होंने नर्सिंग के प्रशिखण के लिए एक विद्यालय की स्थापना भी की थी। उन्होंने जीवनपर्यत नर्सिंग के कार्य को बढ़ाने व इसे आधुनिक रूप देने में कार्य किया। वर्ष 1869 में उन्हें महारानी विक्टोरिया ने रॉयल रेडक्रॉस से सम्मानित भी किया था। 90 वर्ष की आयु में 13 अगस्त 1910 को उनका निधन हो गया था। मरीजों की सेवा में लगा नर्सिंग स्टाफ आज भी फ्लोरेंस नाइटिंगेल के दिखाए रास्ते पर चलकर मानव सेवा में लगा है। उन्होंने देश के नर्सिंग स्टाफ से भी आग्रह किया है कि सबसे सच्ची श्रद्धांजलि फ्लोरेंस नाइटिंगेल को यही होगी कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर मानव समाज की सेवा की जाए।


