मुजफ्फरनगर। हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आने के बाद मुजफ्फरनगर में शिकायत दर्ज कराने की मांग उठी है। जिला बार संघ मुजफ्फरनगर के अधिवक्ता गुलाब सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर संबंधित वक्ता जर्जिस अंसारी उर्फ मुल्ला जर्जिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

शिकायतकर्ता अधिवक्ता के अनुसार 22 जुलाई 2026 को बिहार के कटिहार जिले में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए जर्जिस अंसारी ने भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। अधिवक्ता का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

अधिवक्ता ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि कथित बयान का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। उनका आरोप है कि वीडियो को यूट्यूब, फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर शेयर किए जाने के कारण यह बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा। शिकायतकर्ता ने पुलिस से कथित वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग और उसके स्रोत की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील विषय पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से विभिन्न समुदायों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी को देखते हुए अधिवक्ता ने वीडियो की तकनीकी जांच कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि कथित रिकॉर्डिंग वास्तविक है या उसमें किसी तरह की एडिटिंग या छेड़छाड़ की गई है।
अधिवक्ता गुलाब सिंह ने पुलिस से कथित वीडियो को सोशल मीडिया पर सबसे पहले अपलोड करने वाले व्यक्ति का पता लगाने और इसे आगे प्रसारित करने वाले लोगों तथा चैनलों की भी जांच करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की अपील की है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में संबंधित वक्ता के पुराने बयानों को लेकर भी कुछ दावे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि वक्ता पूर्व में भगवान श्रीकृष्ण को लेकर भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है और इस संबंध में लखनऊ के हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज होने की बात कही है। इसके अलावा शिकायत में वाराणसी की एक अदालत से जुड़े पुराने मामले का भी उल्लेख किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अधिवक्ता ने मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इसके अलावा कथित वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जांच में कथित वीडियो की सत्यता, उसके मूल स्रोत और उसमें कही गई बातों के वास्तविक संदर्भ की पुष्टि की जानी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को भी भेजे जाने की बात कही है। उन्होंने मामले में उच्चस्तरीय संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर से आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। कथित बयान का वास्तविक संदर्भ क्या था, वीडियो की प्रमाणिकता कितनी है और किन कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई बनती है, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस की ओर से मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

