मेरठ। जिलाधिकारी/अध्यक्ष जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद दीपक मीणा ने बताया कि उ0प्र0 शासन नमांमि गंगे एंव ग्रामीण जलपूर्ति अनुभाग-3 के पत्र एंव निदेशक भूगर्भ जल विभाग उ0प्र0 लखनऊ के पत्र के क्रम में बिना एन0ओ0सी0 प्राप्त किये चल रहे उद्योगों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही किये जाने के निर्देश प्राप्त हुये है।

उत्तर प्रदेश शासन की अधिसूचना के द्वारा उ0प्र0 भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम-2019 प्रख्यापित होने के पश्चात ट्यूबवेल/बोरबेल/सबमर्सिबल के माध्यम से भूजल निष्कषर्ण कर रहें समस्त वाणिज्यक, औद्योगिक, अवसंरचात्मक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ताओं (यथा डेयरी/होटलों/लाजों/निजी आवासीय भवनों/आवासीय कालोनियों/रिजार्टो/निजी चिकित्सालयों/परिचर्या गृहों/कारबार प्रक्षेत्रों/माॅल्स/वाटर पार्को) तथा वेधन अभिकरण (ड्रिलिंग एजेन्सी) को जिला भूगर्भ जल प्रबन्धन परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र (छव्ब्)/रजिस्ट्रीकरण लिया जाना अनिवार्य है। अन्यथा की दशा में उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम-2019 की धारा 39 के अन्तर्गत धनराशि 02 लाख से 05 लाख तक र्जुमाना और/अथवा 06 माह से 01 वर्ष का कारावास के साथ दण्डित किया जा सकता है।

उन्होने समस्त वाणिज्यक, औद्योगिक, अवसंरचात्मक और सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ता तथा वेधन अभिकरण (ड्रिलिंग एजेन्सी) को निर्देशित करते हुये कहा कि उपरोक्त आदेशो के क्रम में भू-गर्भ जल दोहन के सम्बन्ध में आवश्यक उपकरण व अन्य मानको की पूर्ति करते हुए, 15 दिन के अन्दर आॅनलाईन पंजीकरण https://niveshmitra.up.nic.in/ पर कराते हुए एनओसी/अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें। अन्यथा की स्थिति में आपके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
आॅनलाईन पंजीकरण में किसी भी कठिनाई के सम्बन्ध में श्री आदित्य कुमार पाण्डेय, सीनियर जियोफिजिसिस्ट, भूगर्भ जल विभाग, खण्ड मेरठ पताः-बी-371, गंगानगर-मेरठ से एंव http://upgwdonline.in पर सम्पर्क किया जा सकता है ।
