श्री सत्यसाईं संजीवनी चिल्ड्रेन्स हार्ट अस्पताल का उद्घाटन

श्री सत्यसाईं संजीवनी चिल्ड्रेन्स हार्ट अस्पताल का उद्घाटन

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिजी की राजधानी सुवा में बच्चों में हृदय रोगों का उपचार करने वाले एक अस्पताल श्री सत्यसाईं संजीवनी चिल्ड्रेन्स हार्ट अस्पताल का आज वीडियो माध्यम से उद्घाटन किया और कहा कि यह अस्पताल ना केवल फिजी बल्कि प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में सेवा का एक मजबूत अधिष्ठान बनेगा।

मोदी ने इस अवसर पर सुवा में मौजूद फिजी के प्रधानमंत्री फ्रेंक बेनीमरामा को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। सुवा में यह सुपर स्पेयशियलटी अस्पताल आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्ती स्थित साईं प्रेम फाउंडेशन द्वारा बनाया गया है।

इस अवसर पर मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सुवा में श्री सत्य साई संजीवनी चिल्ड्रेन्स हार्ट हॉस्पिटल हमारे आपके पारस्परिक रिश्तों और प्रेम का एक और प्रतीक तथा भारत और फ़िजी की साझा यात्रा का एक और अध्याय है। उन्होंने कहा, “ये चिल्ड्रेन्स हार्ट हॉस्पिटल न केवल फ़िजी में, बल्कि पूरे दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में पहला बाल हृदयरोग अस्पताल है। एक ऐसे क्षेत्र के लिए, जहां हृदय से जुड़ी बीमारियां बड़ी चुनौती हों, ये अस्पताल हजारों बच्चों को नया जीवन देने का माध्यम बनेगा। यहाँ हर बच्चे को न केवल विश्व स्तरीय उपचार मिलेगा, बल्कि सभी सर्जरीज़ निशुल्क भी होंगी। मैं इसके लिए फ़िजी सरकार, साई प्रेम फ़ाउंडेशन फ़िजी और भारत के श्री सत्य साई संजीवनी चिल्ड्रेन्स हार्ट हॉस्पिटल की बहुत-बहुत सराहना करता हूँ।

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर ब्रह्मलीन श्री सत्य साई बाबा को नमन करते हुए कहा कि मानवता की सेवा के लिए उनके द्वारा रोपा गया बीज आज वटवृक्ष के रूप में लोगों की सेवा कर रहा है। सत्य साईं बाबा ने अध्यात्म को कर्मकांड से मुक्त करके जनकल्याण से जोड़ने का अदभुत काम किया था। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य, स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके कार्य, गरीब-पीड़ित-वंचित के लिए उनके सेवाकार्य, आज भी हमें प्रेरणा देते हैं। दो दशक पहले जब गुजरात में भूकंप से तबाही मची थी, उस समय बाबा के अनुनायियों द्वारा जिस प्रकार पीड़ितों की सेवा की गई, वो गुजरात के लोग कभी भी भूल नहीं सकते।

मोदी ने कहा कि हमारे यहां कहा जाता है, ‘परोपकाराय सतां विभूतयः’। अर्थात्, परोपकार ही सज्जनों की संपत्ति होती है। मानव मात्र की सेवा, जीव मात्र का कल्याण, यही हमारे संसाधनों का एक मात्र उद्देश्य है। इन्हीं मूल्यों पर भारत और फ़िजी की साझी विरासत खड़ी हुई है। इन्हीं आदर्शों पर चलते हुये कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी भारत ने अपने कर्तव्यों का पालन किया है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ यानी, पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हुये भारत ने दुनिया के 150 देशों को दवाएं भेजीं, जरूरी सामान भेजा। अपने करोड़ों नागरिकों की चिंता के साथ साथ भारत ने दुनिया के अन्य देशों के लोगों की भी चिंता की। हमने करीब-करीब 100 देशों को 10 करोड़ के आसपास वैक्सीन्स भेजी हैं। इस प्रयास में हमने फ़िजी को भी अपनी प्राथमिकता में रखा। खुशी की बात है कि फ़िजी के लिए पूरे भारत की उस अपनत्व भरी भावना को साई प्रेम फ़ाउंडेशन यहाँ आगे बढ़ा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे दोनों देशों के बीच विशाल समुद्र जरूर है लेकिन हमारी संस्कृति ने हमें एक दूसरे से जोड़कर रखा है। हमारे रिश्ते आपसी सम्मान, सहयोग, और हमारे लोगों के मजबूत आपसी सम्बन्धों पर टिके हैं। भारत का ये सौभाग्य है कि हमें फ़िजी के सामाजिक-आर्थिक विकास में भूमिका निभाने, योगदान करने का अवसर मिलता रहा है। बीते दशकों में भारत-फ़िजी के रिश्ते हर क्षेत्र में लगातार आगे बढ़े हैं, मजबूत हुये हैं। फ़िजी और प्रधानमंत्री के सहयोग से हमारे ये रिश्ते आने वाले समय और भी मजबूत होंगे।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है, ये हॉस्पिटल फ़िजी और इस पूरे क्षेत्र में सेवा का एक मजबूत अधिष्ठान बनेगा, और भारत-फ़िजी रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।”

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