मुजफ्फरनगर। छपार क्षेत्र स्थित रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मौजूद लोगों ने शहीद स्थल पर पुष्प अर्पित कर बलिदानियों को नमन किया और राज्य आंदोलन के संघर्षपूर्ण इतिहास को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा में संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद उत्तराखंड की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास संघर्ष और बलिदान से जुड़ा हुआ है। अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया और इस दौरान कई लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने आंदोलन में शामिल रहे युवाओं और आंदोलनकारियों को भी नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग को भुलाया नहीं जा सकता।

मधु भट्ट ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है। आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की स्मृतियां आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में शामिल रहे लोगों के संघर्ष और भावनाओं को समझना जरूरी है। उत्तराखंड राज्य का गठन लंबे आंदोलन के बाद हुआ और आंदोलनकारियों की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
शहीद स्थल को बताया बलिदानियों की स्मृति का केंद्र
मधु भट्ट ने रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल को शहीदों का धाम बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक स्मारक नहीं है, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में बलिदान देने वाले लोगों की स्मृतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। उन्होंने कहा कि इस स्थल को वह मंदिर के समान मानती हैं, जहां आने वाले लोगों को आंदोलनकारियों के संघर्ष और योगदान की याद आती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों का संरक्षण और सम्मान आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उत्तराखंड राज्य के निर्माण से जुड़े संघर्ष और त्याग को समझ सकें। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की स्मृतियों को सुरक्षित रखना इतिहास को जीवित रखने का भी एक माध्यम है।
आंदोलनकारियों के संघर्ष को किया याद
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी सड़कों पर उतरे और विभिन्न परिस्थितियों के बावजूद अपना संघर्ष जारी रखा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान कई आंदोलनकारियों को लाठियां सहनी पड़ीं और कई लोगों ने गोलियां भी झेलीं। इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने अलग राज्य की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के पीछे आंदोलनकारियों का योगदान महत्वपूर्ण है और उनके संघर्ष को हमेशा याद किया जाना चाहिए।
संस्कृति और विरासत को सुरक्षित रखने पर जोर
मधु भट्ट ने कहा कि आंदोलनकारियों का एक प्रमुख सपना अलग उत्तराखंड राज्य का था, जो राज्य गठन के साथ पूरा हुआ। अब राज्य की संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है। इन परंपराओं और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीदों को श्रद्धांजलि केवल उन्हें याद करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके संघर्ष और मूल भावनाओं को समझना भी जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में रामपुर तिराहा कांड में बलिदान देने वाले सभी शहीदों की स्मृति को नमन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने शहीद स्थल पर पुष्प अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि रामपुर तिराहा शहीद स्थल उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा।

