राजनीतिक वर्चस्व की जंग में रमाकांत पर भारी पड़े यशवंत

राजनीतिक वर्चस्व की जंग में रमाकांत पर भारी पड़े यशवंत

मऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन वाली सीटों पर हुए चुनाव में इस बार आजमगढ़-मऊ सीट पर दो दलों के साथ दो परिवारों के बीच सियासी वर्चस्व का रोचक मुकाबला देखने को मिला।
पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारे के रूप में पहचान रखने वाली आजमगढ़-मऊ सीट पर दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक शिष्य यशवंत सिंह ने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता रमाकांत यादव के राजनीतिक वर्चस्व को तगड़ी टक्कर देकर पहली बार इस सीट को आजमगढ़ के कब्जे से निकालकर मऊ की झोली में डाल दिया है। मंगलवार को हुयी मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह के पुत्र विक्रांत सिंह ‘रिशु’ ने रमाकांत के बेटे और भाजपा उम्मीदवार अरुणकांत यादव को चुनावी पटखनी दे दी।
इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डटे भाजपा के बागी विक्रांत सिंह ‘रिशु’ को 2813 मतों के अंतर से विजयश्री हासिल हुई है। उन्हें कुल 4075 मत प्राप्त हुए। वहीं भाजपा प्रत्याशी अरुणकान्त यादव को 1262 तथा सपा प्रत्याशी राकेश यादव को मात्र 356 मत प्राप्त हुए हैं। इस चुनाव परिणाम के साथ ही संभवत: यह पहली बार होगा जब उप्र विधान परिषद में पिता पुत्र एक साथ दिखेंगे।
क्षेत्र में राजनीतिक वजूद कायम करने की इस लड़ाई में रामाकांत और यशवंत ने अपनी दलीय प्रतिबद्धताओं को दरकिनार कर इस चुनाव में अपने बेटों की चुनावी जीत को नाक का सवाल बना लिया था। रोचक राजनीतिक नूराकुश्ती की नजीर बने इस चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लागातार निशाना साध रहे सपा विधायक रमाकांत यादव के पुत्र व भाजपा से विधायक रहे अरुणकांत यादव विधान परिषद चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी बन गए। अरुणकांत पिछले दो विधानसभा चुनाव से लगातार भाजपा विधायक चुने जाते रहे हैं।
दूसरी ओर लगभग दो दशक से लगातार विधान परिषद सदस्य रहे यशवंत सिंह के पुत्र विक्रांत सिंह ‘रिशु’ को भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। यशवंत फिलहाल भाजपा के विधान परिषद सदस्य हैं, हालांकि उन्हें बेटे के बागी होने का तब खामियाजा भुगतना पड़ा जब उन्हें भी भाजपा से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया। इस प्रकार यह चुनाव आजमगढ़ मऊ की दो राजनीतिक हस्तियों के राजनीतिक वर्चस्व की जंग में तब्दील हो गया।
खास बात यह रही कि हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में आजमगढ़ और मऊ जनपद की कुल 14 विधानसभा सीटों में से 13 सीटों पर सपा जीती है। महज मधुबन विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। इसके बावजूद विधान परिषद चुनाव में सपा जीत का परचम नहीं लहरा सकी।
आजमगढ़-मऊ स्थानीय निकाय चुनाव में बीते कुछ दशकों में केवल आजमगढ़ के एक ही जाति के प्रत्याशी सफल हुए हैं। लेकिन अब यह सीट आजमगढ़ और जाति विशेष के दायरे से बाहर निकल कर मऊ जनपद की झोली में गयी है। इस सीट पर चुनाव पूरी तरह से भाजपा प्रत्याशी अरुणकांत और भाजपा के बागी रिशु के ही इर्दगिर्द केन्द्रित रहा।
इस दौरान हालांकि, कुछ रोचक नजारे भी देखने को मिले जब भाजपा प्रत्याशी अरुणकांत के पक्ष में सपा विधायक उनके पिता रमाकांत यादव द्वारा गोलबंदी की जाती रही। वहीं, भाजपा से निष्कासन हो जाने के बाद यशवंत सिंह भी अपने पुत्र के समर्थन में खुलकर जनसंपर्क करते नजर आये। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विक्रांत सिंह ‘रिशु’ की चुनाव में एकतरफा जीत ने इलाके में उनके परिवार की सियासी हनक को कायम कर दिया।

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