मेवाड में गवरी नाट्य नृत्य की धूम

उदयपुर। राजस्थान के आदिवासी बहुल मेवाड क्षेत्र में भील जनजाति की अटूट श्रद्धा एवं उपासना का प्रतीक नारंपरिक गवरी नाट्य नृत्य की धूम इन दिनों परवान पर है।
गवरी दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, राजसमंद, चित्तौडगढ एवं बांसवाडा जिलो मे बसे भीलों का एक धार्मिक संस्कार पूर्ण नाट्योत्सव है। सामाजिक मान्यता के अनुसार धन की देवी लक्ष्मी भीलों की आराध्यदेवी मां गोरज्या देवी के रूप में धरतर आकर सवा महीने तक भ्रमण करती है।
रक्षाबंधन के दूसरे दिन ठंडी राखी से लेकर अगले आठ दस दिन तक मेवाड में भीलों के अधिकांश गांवों मंें गोरज्या माता की पूजा करके भील समाज द्वारा नाट्य नृत्य शुरू किया जाता है। भील समाज के लोग सवा महीने तक विभिन्न गांवों में घूम- घूम कर गवरी नाट्य नृतय करते है। इस दैरान भील समाज के लोगों द्वारा मांस, मदिरा का सेवन नहीं करना, चारपाई पर नहीं सोना, पैरो में जूते नहीं पहनने, स्नान नहीं करने तथा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने जैसे कडे नियमों का पालन किया जाता है।
यह व्रत एवं उपासना एवं सार्वजनिक एवं सर्व मंगल के लिए किया जाता है। यह अच्छी वर्षा, अच्छी फसलें,अज्ञात महामारी से पशुधन एवं मानव की रक्षा की कामना से किया जातने वाला अनुष्ठान है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *