मेरठ/मुजफ्फरनगर। मेरठ के मंगल पांडेय नगर स्थित एक्सिस बैंक की मुख्य करेंसी चेस्ट में भारी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद बैंकिंग सिस्टम में हड़कंप मच गया है। करेंसी चेस्ट से बरामद करीब 4.63 लाख रुपये मूल्य की नकली करेंसी के तार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के कई शहरों में स्थित बैंक शाखाओं से जुड़े होने की जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीनों राज्यों की 186 बैंक शाखाओं को जांच के दायरे में लिया है।

जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नकली नोट बैंकिंग सिस्टम में कहां से और किस माध्यम से पहुंचे। पुलिस अब उन शाखाओं और खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनके जरिए संदिग्ध करेंसी मेरठ की करेंसी चेस्ट तक पहुंची।

करेंसी चेस्ट से मिले 1,323 नकली नोट
मंगल पांडेय नगर स्थित एक्सिस बैंक की शाखा में रखी करेंसी चेस्ट की आंतरिक जांच के दौरान 500, 200, 100 और 50 रुपये मूल्यवर्ग के कुल 1,323 नकली नोट बरामद किए गए। इन नोटों की कुल कीमत करीब 4.63 लाख रुपये बताई गई है।
मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने बैंक पहुंचकर करेंसी चेस्ट में कैश जमा होने और नोटों के सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाई।
एक साल के कैश रिकॉर्ड की जांच में खुलासा
बताया गया कि बैंक प्रबंधन ने एक दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जमा हुई करेंसी की आंतरिक जांच कराई थी। इसी जांच के दौरान अलग-अलग मूल्यवर्ग के 1,323 जाली नोट सामने आए।
मामले में मंगल पांडेय नगर शाखा के बैंक प्रबंधक सरताज सिंह ने 16 सितंबर को एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइन थाने में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस टीम ने बैंक पहुंचकर करेंसी चेस्ट में नकदी की एंट्री, सत्यापन और जमा करने की प्रक्रिया की जानकारी ली। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि जाली नोट किन शाखाओं और किन खातों के माध्यम से बैंकिंग सिस्टम में दाखिल हुए।
तीन राज्यों की 186 शाखाएं जांच के दायरे में
बैंक प्रबंधन की ओर से पुलिस को उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार, मेरठ की इस करेंसी चेस्ट में तीन राज्यों की कुल 186 बैंक शाखाओं का कैश जमा कराया जाता है। इसी वजह से पुलिस इन सभी शाखाओं से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।
उत्तर प्रदेश में मेरठ के अलावा सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और मुरादाबाद की शाखाएं जांच के दायरे में बताई जा रही हैं।
उत्तराखंड में रुड़की, काशीपुर, हरिद्वार, हल्द्वानी और देहरादून की शाखाओं से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। वहीं हरियाणा में सोनीपत, पानीपत और अंबाला सहित अन्य संबंधित शाखाओं की जानकारी खंगाली जा रही है।
जाली नोटों के स्रोत का पता लगाने में जुटी पुलिस
पुलिस अब 186 शाखाओं के रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध नोट सबसे पहले किस बैंक शाखा या खाते के जरिए बैंकिंग सिस्टम में पहुंचे। इसके साथ ही नकली नोटों के एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के संभावित रास्तों और संबंधित लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
पुलिस मेरठ और आसपास के जिलों में पहले सामने आ चुके नकली नोटों से जुड़े मामलों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। पूर्व में जिन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच या एटीएस जैसी एजेंसियों ने की है, उनके रिकॉर्ड से भी मौजूदा मामले की कड़ियां मिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
एटीएस या एनआईए को जांच सौंपे जाने की संभावना
तीन राज्यों की बैंक शाखाओं से जुड़े इस मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच के दौरान बड़े नेटवर्क या अन्य गंभीर कड़ियां सामने आती हैं तो मामले की जांच आगे चलकर एटीएस या राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने पर भी विचार हो सकता है।
इस बीच पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले के अनुसार, पुलिस हर बिंदु पर पड़ताल कर रही है। बैंक प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराई गई शाखाओं की सूची के आधार पर जाली नोटों के स्रोत और उनके आवागमन के रास्ते का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि 1,323 जाली नोट बैंकिंग व्यवस्था में किस स्तर पर दाखिल हुए और उन्हें मेरठ की करेंसी चेस्ट तक पहुंचने में किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।

