मुजफ्फरनगर से विदेशों तक मुख्य रूप से चीनी, गुड़ और पेस्टिसाइड जैसे उत्पादों का निर्यात हो रहा है। मुजफ्फरनगर को भारत का ‘चीनी का कटोरा कहा जाता है, और यहां की बनी चीनी व गुड़ दुबई और तंजानिया जैसे कई देशों तक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा यहां की कृषि और पेस्टिसाइड कंपनियां भी अपने उत्पाद 27 देशों में भेजती हैं।मुख्य बिंदु:चीनी और गुड़: मुजफ्फरनगर में गन्ने की बंपर पैदावार होती है। एक समय में मुज़फ्फरनगर का नाम अपराधों में भी सर्वोच्चता पर रहा है। आज भी अपराधी मामलों और अपराध दर के लिहाज से मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश के शीर्ष संवेदनशील या उच्च अपराध वाले जिलों में गिना जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मुज़फ्फरनगर, मेरठ, और गौतम बुद्ध नगर जैसे जिलों को राज्य में सबसे ज्यादा अपराध दर्ज करने वाले मुख्य क्षेत्रों में माना जाता है।

आज जब देश मे साइबर क्राइम अधिक तेजी से बढ़ रहा है और उसके शिकार आम लोगों के अलावा पुलिस के बड़े अधिकारी, विधायक व मंत्री तक हो रहे हैं, तब मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है।
ताज़ा मामला राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल का है। प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के नाम और पद का कथित तौर पर दुरुपयोग कर साइबर धोखाधड़ी की कोशिश का मामला सामने आया है। शहर के ट्रैवल कारोबारी मोहम्मद शाहिद ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कारोबारी का आरोप है कि अज्ञात लोगों ने पहले खुद को मंत्री का निजी सहायक बताया और बाद में मंत्री बनकर उनसे बातचीत की। शिकायतकर्ता मोहम्मद शाहिद जॉन्स ट्रेवल्स, मुजफ्फरनगर के संचालक हैं। उनके अनुसार, मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को मंत्री कपिल देव अग्रवाल का पीए बताया और कहा कि कुछ देर बाद मंत्री उनसे बात करेंगे। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन पर बातचीत की और खुद को राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल बताते हुए कहा कि उनके एक परिचित के लिए 18 अगस्त को लखनऊ से चंडीगढ़ की फ्लाइट टिकट बुक करानी है। शाहिद के अनुसार, फोन करने वाले ने यात्री को वीआईपी अतिथि और पार्टी से जुड़ा व्यक्ति बताया। बातचीत के दौरान उन्हें कुछ संदेह हुआ। उन्होंने टिकट बुक करने से पहले यात्री की पहचान सत्यापित करने के लिए वैध पहचान पत्र मांगा।

आरोप है कि शुरुआत में पहचान पत्र देने को लेकर टालमटोल की गई। बाद में व्हाट्सएप के जरिए एक आधार कार्ड भेजा गया। उस पर भालिंदर पाल सिंह नाम लिखा था। कारोबारी ने जब संबंधित यात्री की पहचान की पुष्टि करने और सीधे मंत्री से बातचीत कराने को कहा तो कथित तौर पर फोन तुरंत काट दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कॉल कटने के बाद व्हाट्सएप पर भेजा गया आधार कार्ड भी डिलीट कर दिया गया। उन्होंने संबंधित नंबर पर दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इसके बाद कारोबारी को आशंका हुई कि किसी व्यक्ति या गिरोह ने मंत्री के नाम और पद का इस्तेमाल कर भरोसा हासिल करने और साइबर ठगी करने की कोशिश की है। मामला मंत्री से जुड़ा हुआ है तो जांच तेजी से की जाएगी इसमें कोई संदेह नहीं है।
वैसे तो उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी के मामले बढ़े है इस साल के छह महीने में ही 1.85 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुई है। इन मामलों में नागरिकों को लगभग 734 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मुजफ्फरनगर में इस साल साइबर ठगी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। अलग-अलग मामलों में दर्जनों लोग और बड़े कारोबारी इसका शिकार हुए हैं। साइबर ठगों ने एक कारोबारी का व्हाट्सएप हैक करके उनके अकाउंटेंट से करीब 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे, जिसमें पुलिस ने 1.23 करोड़ रुपये फ्रीज कराए। पुलिस ने लोन दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों और महिलाओं के नाम पर 70 से अधिक फर्जी बैंक (म्यूल) खाते खुलवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 4 आरोपियों को पकड़ा, जिनमें डेढ़ करोड़ रुपये का लेन-देन मिला। सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर निवेश के नाम पर 1 करोड़ 1 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। साइबर सेल ने कार्रवाई करते हुए कई मामलों में लोगों के फंसे हुए पैसे वापस भी कराए हैं।
