मुजफ्फरनगर। फुगाना थाना क्षेत्र के गांव हबीबपुर सीकरी में कच्चा मकान ढहने से हुई दर्दनाक घटना के बाद सोमवार को पूरा गांव शोक में डूबा रहा। पोस्टमार्टम के बाद जब इस्लामउद्दीन और उनके चार मासूम बच्चों के शव गांव पहुंचे तो माहौल गमगीन हो गया। एक साथ पांच जनाजे उठने का मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में मातम पसरा रहा और शोक स्वरूप अधिकांश घरों में चूल्हा तक नहीं जला।

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
गांव के कब्रिस्तान में 52 वर्षीय इस्लामउद्दीन, उनकी 12 वर्षीय बेटी रुखसार, 5 वर्षीय अलसिफा, 2 वर्षीय पुत्र आहद और आठ माह के मासूम जीशान को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। एक साथ पिता और चार बच्चों को अंतिम विदाई देने पहुंचे ग्रामीणों की आंखें नम थीं। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग शामिल हुए।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अंतिम दर्शन के दौरान मृतकों की मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वे शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। परिजन और गांव की महिलाएं उन्हें संभालने का प्रयास करती रहीं, लेकिन परिवार पर टूटे दुख के पहाड़ ने पूरे माहौल को बेहद भावुक बना दिया।
इस्लामउद्दीन दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। एक ही हादसे में उनका और उनके चार बच्चों का निधन होने से परिवार पूरी तरह उजड़ गया। इस घटना ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
गांव में पसरा रहा सन्नाटा
हादसे के बाद पूरे दिन गांव में शोक का माहौल बना रहा। अधिकांश लोग पीड़ित परिवार के साथ रहे। गांव की गलियों और चौपालों पर सिर्फ इसी दर्दनाक घटना की चर्चा होती रही। ग्रामीणों ने इस हादसे को गांव के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बताया।
नेताओं ने जताई संवेदना
पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता गांव पहुंचे। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, बुढ़ाना विधायक राजपाल बालियान, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जिया चौधरी, वरिष्ठ सपा नेता एवं बार संघ अध्यक्ष प्रमोद त्यागी, संजीव बालियान सहित कई जनप्रतिनिधियों ने शोक व्यक्त किया और परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया।
25 लाख रुपये की सहायता की संस्तुति
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की संस्तुति शासन को भेजी गई है। प्रशासन का कहना है कि शासन से स्वीकृति मिलने के बाद सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
हबीबपुर सीकरी की यह त्रासदी पूरे मुजफ्फरनगर को गहरे शोक में छोड़ गई है। एक पिता और उसके चार मासूम बच्चों का एक साथ असमय दुनिया से चले जाना हर किसी को झकझोर गया है। गांव आज भी उस हादसे को याद कर सिसक रहा है, जिसने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं।

