मुजफ्फरनगर सदर बाजार में 72 लाख की कथित धोखाधड़ी! तीन दुकानों का सौदा कर रकम लेने का आरोप, SSP से शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज

मुजफ्फरनगर सदर बाजार में 72 लाख की कथित धोखाधड़ी! तीन दुकानों का सौदा कर रकम लेने का आरोप, SSP से शिकायत के बाद मुकदमा दर्ज

मुजफ्फरनगर। शहर के सदर बाजार में तीन दुकानों की खरीद-फरोख्त के मामले में 72 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप सामने आया है। आयुष गारमेंट्स के संचालक आयुष कुमार ने दूसरे कारोबारी पुष्पेंद्र कुमार पर दुकानों का सौदा तय करने के बाद बड़ी रकम लेने और बैनामा नहीं कराने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, तीनों दुकानों की कुल कीमत 90 लाख रुपये तय हुई थी, जिसके एवज में वह 72 लाख रुपये का भुगतान कर चुका है। इसके बावजूद उसे दुकानों का मालिकाना हक नहीं मिला। मामले में आयुष कुमार ने सात सितंबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सदर बाजार की तीन दुकानों का 90 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा

साउथ कृष्णापुरी निवासी आयुष कुमार पुत्र मांगे राम ने अपनी शिकायत में बताया कि सदर बाजार में उनकी आयुष गारमेंट्स के नाम से दुकान है। वहीं, ग्राम मेघाखेड़ी निवासी पुष्पेंद्र कुमार पुत्र सत्यपाल सिंह भी सदर बाजार में दिव्या गारमेंट्स के नाम से कारोबार करता था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दोनों के बीच पहले से घरेलू और व्यापारिक संबंध थे। इसी परिचय के चलते उनके बीच संपत्ति की खरीद-फरोख्त को लेकर बातचीत हुई थी।

आयुष का आरोप है कि पुष्पेंद्र कुमार ने सदर बाजार स्थित अपनी तीन दुकानों को बेचने का प्रस्ताव रखा था। बातचीत के दौरान प्रत्येक दुकान की कीमत 30 लाख रुपये तय की गई। इस तरह तीनों दुकानों का कुल सौदा 90 लाख रुपये में तय हुआ। शिकायतकर्ता के अनुसार, सौदे पर सहमति बनने के बाद उसने अलग-अलग समय पर रकम का भुगतान करना शुरू कर दिया था।

49 लाख रुपये नकद देने का दावा

आयुष कुमार ने पुलिस को दी गई शिकायत में दावा किया कि उसने 21 जनवरी 2019 को पुष्पेंद्र कुमार को अलग-अलग किस्तों में कुल 49 लाख रुपये नकद दिए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस लेनदेन का पूरा हिसाब उसकी लेजर में दर्ज है। उसके मुताबिक, लेजर में संबंधित प्रविष्टियों के साथ पुष्पेंद्र की लिखावट और हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

आयुष का आरोप है कि नकद भुगतान के बाद भी उसने संपत्ति के सौदे को पूरा करने के लिए रकम दी, लेकिन इसके बावजूद दुकानों का बैनामा उसके पक्ष में नहीं कराया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस से लेजर में दर्ज हिसाब और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

दो दिन में बैंक खातों से भेजे 23 लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, नकद भुगतान के अतिरिक्त बैंक खातों के माध्यम से भी पुष्पेंद्र कुमार को रकम हस्तांतरित की गई थी। आयुष का दावा है कि 12 फरवरी 2024 को उसके मित्र बाबू के आदर्श महिला बैंक खाते से पुष्पेंद्र के खाते में नौ लाख रुपये भेजे गए थे। इसके अगले दिन, 13 फरवरी 2024 को आयुष ने अपने आईसीआईसीआई बैंक खाते से पुष्पेंद्र के खाते में 14 लाख रुपये हस्तांतरित किए।

इस प्रकार शिकायतकर्ता के मुताबिक, 49 लाख रुपये नकद और बैंक खातों के माध्यम से भेजे गए 23 लाख रुपये को मिलाकर कुल 72 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था। आयुष का कहना है कि इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद उसे तीनों दुकानों का बैनामा नहीं मिला और न ही संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त हुआ।

बैनामा कराने की मांग पर बीमारी का हवाला देने का आरोप

आयुष कुमार ने शिकायत में आरोप लगाया कि जब उसने पुष्पेंद्र कुमार से दुकानों का बैनामा कराने के लिए कहा, तो इसके अगले दिन पुष्पेंद्र ने अपनी बीमारी का हवाला दिया और ईवान अस्पताल में भर्ती हो गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसके बाद पुष्पेंद्र की ओर से याददाश्त चले जाने की बात कही जाने लगी।

आयुष ने यह भी आरोप लगाया कि पुष्पेंद्र के परिजनों ने उसे अस्पताल में मिलने से रोक दिया और उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज की। हालांकि, बीमारी और याददाश्त से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इन तथ्यों की वास्तविक स्थिति संबंधित चिकित्सकीय अभिलेखों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

किरायेदारों से भी रकम लेने का आरोप

शिकायतकर्ता ने मामले में यह आरोप भी लगाया है कि बाद में उसे बाजार से जानकारी मिली कि जिन तीन दुकानों का सौदा उसके साथ तय हुआ था, उनके मौजूदा किरायेदारों से भी कथित तौर पर रकम ली गई थी। आयुष का कहना है कि पुष्पेंद्र कुमार और उसके परिवार के लोग अपने घर से कहीं चले गए हैं और उसे न तो उसकी रकम वापस मिली है और न ही सौदे के मुताबिक दुकानों का बैनामा कराया गया है।

हालांकि, किरायेदारों से रकम लिए जाने और संबंधित परिवार के कहीं चले जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन पहलुओं की जांच के लिए संबंधित लोगों के बयान और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

एसएसपी को प्रार्थना पत्र देने के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

आयुष कुमार ने सात सितंबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले में मुकदमा दर्ज कराने और कार्रवाई करने की मांग की थी। शिकायत में उसने तीन दुकानों के सौदे, नकद भुगतान, बैंक खातों से किए गए हस्तांतरण और बैनामा नहीं होने का पूरा विवरण दिया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान नकद भुगतान से संबंधित लेजर, बैंक खातों के रिकॉर्ड, दुकानों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और किरायेदारी से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

72 लाख रुपये के भुगतान और संपत्ति के स्वामित्व की होगी जांच

शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने 90 लाख रुपये के सौदे में से 72 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे दुकानों का मालिकाना हक नहीं मिला। दूसरी ओर, मामले में आरोपित पक्ष का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दुकानों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था, भुगतान किन शर्तों पर किया गया था और बैनामा नहीं होने के पीछे क्या परिस्थितियां रहीं। साथ ही, शिकायतकर्ता की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड का सत्यापन भी किया जाना है।

फिलहाल, मामला पुलिस जांच के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *